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खालिदा जिया के दूसरे बेटे ने राजनीति को ठुकराकर बांग्लादेश क्रिकेट को दुनिया में दिलाई थी पहचान

नई दिल्ली, 30 दिसंबर (आईएएनएस)। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का मंगलवार को ढाका के एक अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 80 साल की थीं। खालिदा जिया के परिवार का बांग्लादेश की राजनीति के साथ-साथ बांग्लादेश क्रिकेट के उत्थान में अहम योगदान रहा है।

नई दिल्ली, 30 दिसंबर (आईएएनएस)। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का मंगलवार को ढाका के एक अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 80 साल की थीं। खालिदा जिया के परिवार का बांग्लादेश की राजनीति के साथ-साथ बांग्लादेश क्रिकेट के उत्थान में अहम योगदान रहा है।

खालिदा जिया की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए उनके बड़े बेटे, तारिक रहमान, स्वेदश लौट चुके हैं। माना जा रहा है कि बांग्लादेश में आम चुनावों के बाद वह अगले प्रधानमंत्री हो सकते हैं। बांग्लादेश क्रिकेट के उत्थान में खालिदा जिया के दूसरे बेटे, अराफात रहमान 'कोको', का अहम योगदान रहा है। अराफात ने बांग्लादेश में क्रिकेट संरचना को मजबूत करने और प्रतिभावान खिलाड़ियों की क्षमता को पहचानते हुए उन्हें मौका देकर क्रिकेट को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने में अहम भूमिका निभाई।

अराफात रहमान कोको का जन्म 12 अगस्त 1969 को कुमिल्ला कैंटोनमेंट में हुआ था। अराफात एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखते थे जिसके माध्यम से किसी भी क्षेत्र में करियर बनाना उनके लिए आसान था, लेकिन उन्होंने देश के युवाओं की पसंद क्रिकेट को मजबूत बनाने के उद्देश्य से काम शुरू किया।

शुरुआत में डीओएचएस स्पोर्ट्स क्लब के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने देश में क्रिकेट को बढ़ावा दिया। उनके मार्गदर्शन में क्लब ने 2002-03 में प्रीमियर डिवीजन में जगह बनाई थी। टीम को बनाने के लिए अराफात ने बांग्लादेश के पूर्व कप्तान अकरम खान को नियुक्त किया था।

टीम की मजबूती के लिए अराफात रहमान ने श्रीलंका के स्थानीय क्रिकेटर प्रेमलाल फर्नांडो को कोच बनाया और टीम के लिए एक पेशेवर की व्यवस्था की। क्लब के लिए विशेष क्रिकेटिंग पिच का निर्माण करवाया गया और ऑस्ट्रेलिया से गेंदबाजी मशीन मंगवाई गई। इन सुविधाओं का असर क्लब के प्रदर्शन पर दिखा और अराफात के अध्यक्ष रहते दो बार प्रीमियर डिवीजन का खिताब जीतने में उसे सफलता मिली। इस क्लब में केन्या के पूर्व कप्तान स्टीव टिकोलो भी खेले थे।

बांग्लादेश के पूर्व कप्तान तमिम इकबाल ने भी इसी क्लब से अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत की थी।

2001 में बांग्लादेश में आम चुनाव हुए। खालिदा जिया प्रधानमंत्री बनीं। अराफात चाहते तो सरकार में कोई बड़ा पद ले सकते थे, लेकिन उन्होंने देश में क्रिकेट के विकास की गति को और तेज करने का संकल्प लिया और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के विकास परिषद के अध्यक्ष बने। इस दौरान उन्होंने मुशफिकुर रहमान, शाकिब अल हसन और तमिम इकबाल जैसे दिग्गज खिलाड़ियों को सामने लाए।

उनके मार्गदर्शन में बांग्लादेश ने 2004 का अंडर-19 विश्व कप का आयोजन सफलतापूर्वक किया। इस विश्व कप को 4 लाख से अधिक लोगों ने देखा था।

बोगुरा स्थित शहीद चंदू स्टेडियम के निर्माण में भी उनकी अहम भूमिका रही। इसी स्टेडियम में बांग्लादेश ने पहली बार 2006 में श्रीलंका को हराया था। नेशनल स्टेडियम ढाका में हुए विवाद को सुलझाने और मीरपुर के शेर-ए-बांग्ला स्टेडियम के निर्माण में भी उनकी बड़ी भूमिका रही।

बांग्लादेश प्रीमियर लीग की शुरुआत 2012 में हुई थी, लेकिन टी20 क्रिकेट की नींव देश में अराफात ने 2003 में ही रख दी थी।

2005 में अराफात बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड से अलग हो गए थे, लेकिन उस समय तक बांग्लादेश क्रिकेट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो चुका था।

24 जनवरी 2015 को हार्ट अटैक की वजह से मात्र 46 साल की उम्र में अराफात रहमान कोको का निधन मलेशिया में हो गया। अराफात रहमान को बांग्लादेश में क्रिकेट को शून्य से उठाकर शिखर तक ले जाने वाले शिल्पकार के रूप में याद किया जाता है।

--आईएएनएस

पीएके

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