
पटना। बिहार में नई कैबिनेट के शपथ ग्रहण की गूँज अभी थमी भी नहीं थी कि राजधानी पटना की सड़कें रणक्षेत्र में तब्दील हो गईं। शुक्रवार को शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE) 4.0 की अधिसूचना जारी करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे सैकड़ों बीपीएससी अभ्यर्थियों पर पुलिस ने कथित तौर पर लाठीचार्ज किया। यह हंगामा तब शुरू हुआ जब बड़ी संख्या में छात्र बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के आधिकारिक विज्ञापन में हो रही देरी के खिलाफ विरोध जताने के लिए इकट्ठा हुए थे।
छात्र नेता दिलीप कुमार के नेतृत्व में एकजुट हुए उम्मीदवारों ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार जानबूझकर टीआरई 3.0 की प्रक्रिया में देरी कर रही है, जिससे टीआरई 4.0 का भविष्य अधर में लटका हुआ है। उनकी मुख्य मांगें हैं:
टीआरई 4.0 की आधिकारिक भर्ती अधिसूचना तत्काल जारी की जाए।
रिक्त पदों की सही संख्या सार्वजनिक की जाए और भर्ती प्रक्रिया की स्पष्ट समय-सीमा (Timeline) घोषित हो।
शिक्षक भर्ती में बिहार के स्थानीय युवाओं के हितों की रक्षा के लिए 'डोमिसाइल नीति' (अधिवास नीति) को सख्ती से लागू किया जाए।
प्रदर्शन के दौरान छात्र नेता दिलीप कुमार ने सरकार की प्राथमिकताओं पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ सरकार मंत्रिमंडल विस्तार और सत्ता समीकरणों को साधने में व्यस्त है, वहीं दूसरी तरफ लाखों बेरोजगार युवा सड़कों पर लाठियां खाने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा, "अभ्यर्थियों ने महीनों पुस्तकालयों में रात-दिन एक कर पढ़ाई की है, लेकिन सरकार उनकी जायज मांगों को सुनने के बजाय बल प्रयोग कर रही है।" छात्र नेता ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जल्द ही अधिसूचना जारी नहीं हुई, तो यह आंदोलन एक अनिश्चितकालीन घेराव और व्यापक विरोध प्रदर्शन का रूप ले लेगा।
जैसे ही प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते हुए आगे बढ़े, पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। बहस बढ़ने पर स्थिति अनियंत्रित हो गई, जिसके बाद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। इस कार्रवाई में कई छात्रों को चोटें आने की खबरें हैं। फिलहाल पटना के संबंधित क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पुलिस बल तैनात है। सरकार की ओर से अभी इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन छात्रों के आक्रोश को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड पर है।
प्रदर्शनकारियों की एक बड़ी मांग डोमिसाइल नीति को लेकर है। छात्रों का तर्क है कि अन्य राज्यों की तरह बिहार को भी अपनी भर्तियों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए। उनका कहना है कि बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों के आने से बिहार के मूल निवासी युवाओं के अवसर कम हो रहे हैं, जिसे लेकर छात्र वर्ग में लंबे समय से असंतोष पनप रहा है। अब देखना यह होगा कि नई कैबिनेट इन युवाओं की मांगों पर क्या रुख अपनाती है।
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