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मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता को जारी कर दी गई दो वोटर आईडी, आयोग से मांगा जवाब


भोपाल 30 मई (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता मिथुन अहिरवार ने चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि पहले उनका वोटर लिस्ट से नाम काट दिया गया था और अब उनकी एक नहीं दो वोटर आईडी जारी कर दी गई है। मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता मिथुन अहिरवार ने बताया कि पिछली एसआईआर प्रक्रिया में उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया था। बाद में चुनाव आयोग ने संज्ञान लिया था। हालांकि उनका नाम दोबारा जोड़ने के बजाय चुनाव आयोग ने उनके नाम से दो नई वोटर आईडी जारी कर दी हैं।

भोपाल 30 मई (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता मिथुन अहिरवार ने चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि पहले उनका वोटर लिस्ट से नाम काट दिया गया था और अब उनकी एक नहीं दो वोटर आईडी जारी कर दी गई है। मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता मिथुन अहिरवार ने बताया कि पिछली एसआईआर प्रक्रिया में उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया था। बाद में चुनाव आयोग ने संज्ञान लिया था। हालांकि उनका नाम दोबारा जोड़ने के बजाय चुनाव आयोग ने उनके नाम से दो नई वोटर आईडी जारी कर दी हैं।

आश्चर्यजनक बात यह है कि दोनों वोटर आईडी में नाम, पिता का नाम और पता पूरी तरह समान है, केवल वोटर आईडी नंबर अलग-अलग हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग लगातार दावा करता रहा है कि बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन कर रहे हैं। यदि वास्तव में ऐसा हुआ है तो फिर एक ही व्यक्ति के नाम पर दो नई वोटर आईडी कैसे जारी हो गईं? जब आधार कार्ड जैसे यूनिक पहचान दस्तावेज उपलब्ध कराए गए, तब भी यह गंभीर त्रुटि कैसे हुई?

आयोग यह भी बताए कि जारी की गई वोटर आईडी में से वैध कौन सी है और अवैध कौन सी? उन्होंने चुनाव आयोग से यह भी पूछा कि कुछ समय पहले आयोग की ओर से कहा गया था कि जिन मतदाताओं के नाम पिछली सूची से हट गए हैं, वे अपने पुराने मतदाता पहचान पत्र के आधार पर मतदान कर सकेंगे। यदि ऐसा है तो क्या अब वे अपनी पुरानी वोटर आईडी और नई जारी दोनों वोटर आईडी के आधार पर मतदान करने के पात्र होंगे?

क्या एक व्यक्ति को तीन-तीन वोट डालने का अधिकार मिल गया है? मिथुन अहिरवार ने कहा कि यदि यह स्थिति एक राजनीतिक दल के प्रवक्ता के साथ हो सकती है, तो आम नागरिकों के साथ क्या हुआ होगा, इसकी कल्पना की जा सकती है। एक ही घर में कितने-कितने डुप्लीकेट वोटर जोड़े गए होंगे और कितने वास्तविक मतदाता अपने मताधिकार से वंचित हुए होंगे, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस पूरी एसआईआर पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लाखों लोगों का समय और संसाधन लगाए गए, लेकिन यदि परिणामस्वरूप मतदाता सूची में ऐसी गंभीर खामियां सामने आ रही हैं तो इस पूरी प्रक्रिया का औचित्य ही प्रश्नों के घेरे में आ जाता है।

--आईएएनएस

एसएनपी/पीएम

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