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मध्य पूर्व में तनाव से रुपए और देश की विकास दर को काफी कम जोखिम: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 5 मार्च (आईएएनएस)। मध्य पूर्व में तनाव से रुपए के अवमूल्यन और देश की विकास दर को काफी कम जोखिम है। यह जानकारी गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।

नई दिल्ली, 5 मार्च (आईएएनएस)। मध्य पूर्व में तनाव से रुपए के अवमूल्यन और देश की विकास दर को काफी कम जोखिम है। यह जानकारी गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।

एसेट मैनेजमेंट कंपनी श्रीराम वेल्थ की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया कि मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से डिफेंस शेयरों और कीमती मेटल में तेजी देखने को मिल सकती है।

रिपोर्ट में आगे कहा गया कि आरबीआई द्वारा लगाए गए अनुमान से कच्चे तेल में 10 प्रतिशत की तेजी आने के कारण महंगाई में 30 आधार अंक की वृद्धि हो सकती है, लेकिन रुपए के अवमूल्यन और विकास पर इसका प्रभाव काफी कम होगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, रुपए में 5 प्रतिशत की गिरावट से महंगाई में 35 आधार अंक की बढ़त हो सकती है, लेकिन इससे जीडीपी वृद्धि दर में 25 आधार अंक का इजाफा हो सकता है।

फर्म के मुताबिक, आरबीआई के विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप के कारण रुपए के मूल्य में गिरावट सीमित रहने की संभावना है।

रिपोर्ट में कहा गया है, “इसके अतिरिक्त, मौजूदा तनावों में कमी आने से स्थानीय मुद्रा को स्थिर होने में मदद मिलनी चाहिए। इन अनुमानों के आधार पर, हमने घरेलू मुद्रास्फीति और विकास दृष्टिकोण पर तेल की कीमतों के सीमित प्रभावों को देखा है।”

रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में कच्चे तेल के लिए आरबीआई का आधारभूत अनुमान 70 डॉलर प्रति बैरल और डॉलर के मुकाबले रुपए 88 का था। भारतीय कच्चे तेल की औसत कीमत वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में 65 डॉलर प्रति बैरल और हाजिर डॉलर के मुकाबले रुपए का मूल्य 89.5 डॉलर रही है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत के समग्र मैक्रो आर्थिक कारक, जैसे कि 700 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार, प्रबंधनीय व्यापार और चालू खाता घाटा, कम मुद्रास्फीति और ब्याज दरें, और नियंत्रित राजकोषीय घाटा, काफी मजबूत स्थिति में हैं, जो व्यापक अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हैं।

रसायन, पेंट, फार्मा, एयरलाइंस, टायर और ओएमसी जैसी कच्चे तेल पर निर्भर क्षेत्रों को मार्जिन दबाव का सामना करना पड़ सकता है, जबकि मध्य पूर्व में महत्वपूर्ण कारोबार करने वाली कंपनियों को परिचालन और आय संबंधी जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है।

इसमें कहा गया है, "वैश्विक रक्षा खर्च में वृद्धि के बीच बेहतर होते बाजार माहौल से रक्षा क्षेत्र को लाभ मिलने की संभावना है। संघर्ष में किसी भी प्रकार की और वृद्धि से अल्पावधि में सोने और चांदी की कीमतों को समर्थन मिलने की संभावना है, जो सोने और चांदी के ईटीएफ निवेशों के लिए सकारात्मक होगा।"

मध्य पूर्व में लगभग 90 लाख भारतीय रहते हैं, जो प्रेषण में 38 प्रतिशत का योगदान करते हैं, और यह क्षेत्र भारत के निर्यात का 15 प्रतिशत और आयात का 21 प्रतिशत हिस्सा है।

--आईएएनएस

एबीएस/

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