
मुंबई. महाराष्ट्र सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी 'माझी लाडकी बहिन योजना' को लेकर एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है. राज्य सरकार ने अनिवार्य e-KYC (इलेक्ट्रॉनिक नो योर कस्टमर) प्रक्रिया पूरी न करने के कारण लगभग 68 लाख लाभार्थी महिलाओं के खाते बंद कर दिए हैं. इस कार्रवाई के बाद योजना के सक्रिय खातों की संख्या 2.43 करोड़ से घटकर अब मात्र 1.75 करोड़ रह गई है.
क्यों हुई यह बड़ी कार्रवाई?
राज्य प्रशासन के अनुसार, यह कदम पारदर्शिता सुनिश्चित करने और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए उठाया गया है.
समय सीमा का उल्लंघन: लाभार्थियों को 31 मार्च 2026 तक e-KYC पूरा करने का समय दिया गया था. 68 लाख महिलाएं इस समय सीमा के भीतर सत्यापन नहीं करा सकीं.
शिकायतों पर एक्शन: सरकार को अपात्र लोगों द्वारा लाभ लेने की कई शिकायतें मिली थीं, जिसके बाद यह गहन सत्यापन अभियान (Verification Drive) चलाया गया.
बजट आवंटन में भारी गिरावट
सक्रिय खातों की संख्या में आई इस भारी कमी का सीधा असर राज्य के खजाने और आगामी बजट पर पड़ा है:
बजट 2025-26: पिछले वित्त वर्ष में इस योजना के लिए 36,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे.
बजट 2026-27: चालू वित्त वर्ष के लिए आवंटन घटाकर 26,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है. यानी सीधे तौर पर 10,000 करोड़ रुपये की कटौती की गई है.
विशेष नोट: सरकार हर महीने पात्र महिलाओं को 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता देती है, जिसके लिए हर माह करीब 3,700 करोड़ रुपये वितरित किए जाते हैं.
राहत की खबर: बढ़ी समय सीमा (Deadline Extended)
उन महिलाओं के लिए अभी भी उम्मीद बाकी है जिनके खाते बंद हुए हैं. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि:
e-KYC पूरी करने की अंतिम तिथि अब 31 मार्च से बढ़ाकर 30 अप्रैल 2026 कर दी गई है.
यदि बंद किए गए खातों की धारक महिलाएं 30 अप्रैल तक अपनी e-KYC प्रक्रिया पूरी कर लेती हैं, तो उनके खाते दोबारा सक्रिय (Re-activate) कर दिए जाएंगे और उन्हें योजना का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा.
योजना का सफर
बता दें कि एकनाथ शिंदे सरकार ने साल 2024 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले इस योजना की शुरुआत की थी. इसे महाराष्ट्र की राजनीति में 'गेम चेंजर' माना गया था. अब सरकार का पूरा ध्यान केवल 'जेनुइन' या वास्तविक लाभार्थियों तक ही पैसा पहुँचाने पर है.
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