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महाराष्ट्र: मुख्यमंत्री ने समग्र शहरी विकास को गति देने के लिए 'अर्बन चैलेंज फंड' के गठन का किया आह्वान


मुंबई, 13 जुलाई (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को शहरों के विकास को तेज करने के लिए 'शहरी चुनौती कोष' (अर्बन चैलेंज फंड) बनाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि शहर देश की आर्थिक प्रगति के प्रमुख इंजन हैं, इसलिए उनके विकास में आने वाली समस्याओं को योजनाबद्ध तरीके से दूर किया जाना चाहिए।

मुंबई, 13 जुलाई (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को शहरों के विकास को तेज करने के लिए 'शहरी चुनौती कोष' (अर्बन चैलेंज फंड) बनाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि शहर देश की आर्थिक प्रगति के प्रमुख इंजन हैं, इसलिए उनके विकास में आने वाली समस्याओं को योजनाबद्ध तरीके से दूर किया जाना चाहिए।

सीएम देवेंद्र फडणवीस ने इस पहल पर भरोसा जताते हुए कहा कि 'शहरी चुनौती कोष' से शहरों में बुनियादी सुविधाओं और सरकारी सेवाओं में बड़ा सुधार होगा। उन्होंने सोमवार को शहरी विकास विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें इस योजना को लागू करने के तरीके और उसकी रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में अर्बन चैलेंज फंड की वित्तीय व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। इसके तहत कुल 90,000 करोड़ रुपए की परियोजनाओं को लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है।

इस योजना के तहत महाराष्ट्र के लिए 44,800 करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें 11,200 करोड़ रुपए केंद्र सरकार, 11,200 करोड़ रुपए राज्य सरकार देगी, जबकि बाकी 22,400 करोड़ रुपए बाजार आधारित वित्तीय व्यवस्था के जरिए जुटाए जाएंगे। इस राशि का उपयोग शहरों में बड़े और बदलाव लाने वाले विकास कार्यों के लिए किया जाएगा।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि स्थानीय निकायों के लिए धन जुटाने के मामले में महाराष्ट्र पहले ही कई अहम कदम उठा चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य ने इस दिशा में अच्छी प्रगति की है और इसके सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिले हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इससे पहले नासिक और पुणे नगर निगम जलापूर्ति और स्वच्छता परियोजनाओं के लिए सफलतापूर्वक धन जुटा चुके हैं। इन वित्तीय योजनाओं को राष्ट्रीय कार्यकारी समिति (एनईसी) की मंजूरी भी मिल चुकी है।

उन्होंने कहा कि इसी तरह की वित्तीय व्यवस्था को जल्द ही पिंपरी-चिंचवाड़ और नागपुर नगर निगम की विकास परियोजनाओं तक भी बढ़ाया जाएगा, ताकि इन शहरों में भी जरूरी विकास कार्यों को गति मिल सके।

बैठक में बताया गया कि केंद्र और राज्य सरकार की कई शहरी विकास योजनाएं पहले से चल रही हैं। लेकिन, संस्थागत, वित्तीय और प्रशासनिक समस्याओं के कारण कई बुनियादी ढांचा परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पाती हैं। ऐसे में अर्बन चैलेंज फंड शहरों को नगर निगम बॉन्ड और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के जरिए धन जुटाने में मदद करेगा, जिससे इन परियोजनाओं को तेजी से पूरा किया जा सकेगा।

सरकार के अनुसार, इस अभियान के तहत करीब 22 प्रमुख क्षेत्रों पर काम किया जाएगा। इनमें डिजिटल प्रशासन और बुनियादी नागरिक सुविधाओं का विकास, जलापूर्ति और स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और चक्रीय अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकोनॉमी) को बढ़ावा देना, ट्रैफिक जाम कम करने और यातायात प्रबंधन में सुधार, अंतिम छोर (लास्ट माइल) तक बेहतर कनेक्टिविटी, 5 से 20 वर्ग किलोमीटर तक के शहरी क्षेत्रों का पुनर्विकास, छोटे और मध्यम शहरों को विकास केंद्र के रूप में विकसित करना, बाजारों का पुनर्विकास, पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के लिए बेहतर सुविधाएं, पायलट परियोजनाएं, ट्रांजिट हब और ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) से जुड़ी परियोजनाएं तथा शहरों के समग्र विकास से जुड़े अन्य कार्य शामिल हैं।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 'शहरी चुनौती कोष' बनाने का प्रस्ताव ऐसे समय रखा है, जब हाल ही में नितिन करीर की अध्यक्षता वाले छठे महाराष्ट्र वित्त आयोग की रिपोर्ट राज्य विधानसभा में पेश की गई है। इस रिपोर्ट में राज्य के अपने कर राजस्व (एसओटीआर) का 27.3 प्रतिशत हर साल स्थानीय निकायों को देने की सिफारिश की गई है। सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय निकाय आर्थिक रूप से मजबूत होंगे और वित्तीय विकेंद्रीकरण के साथ शहरी विकास को भी गति मिलेगी।

रिपोर्ट में राज्य के अपने कर राजस्व (एसओटीआर) से स्थानीय निकायों को मिलने वाली हिस्सेदारी 26.3 प्रतिशत से बढ़ाकर 27.3 प्रतिशत करने की सिफारिश की गई है। इस अतिरिक्त 1 प्रतिशत राशि को मिलाकर बनने वाले कुल फंड में से 55 प्रतिशत हिस्सा शहरी स्थानीय निकायों और 45 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण स्थानीय निकायों को दिया जाएगा।

इस राशि में से 5 प्रतिशत हिस्सा अच्छा प्रदर्शन करने वाले स्थानीय निकायों को प्रोत्साहन अनुदान के रूप में दिया जाएगा। वहीं, 5 प्रतिशत राशि उन क्षेत्रों के विकास पर खर्च की जाएगी, जहां ग्रामीण इलाके तेजी से शहरी क्षेत्रों में बदल रहे हैं, ताकि वहां की बढ़ती जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा किया जा सके।

--आईएएनएस

एसएचके/डीकेपी

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