मैहर, जंगली हाथियों का मूवमेंट, 25+ गांवों में अलर्ट जारी

मैहर। जिले के वन परिक्षेत्र में दो हाथियों के मूवमेंट की खबर से वन महकमे में हलचल बढ़ गई है। वन मंडल मैहर ने तत्काल एडवाइजरी जारी करते हुए क्षेत्र के 25 से अधिक गांवों के निवासियों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है। हाथियों की लोकेशन पपरा पहाड़ के आसपास बताई जा रही है।
किन गांवों में अलर्ट?
वन विभाग की एडवाइजरी के अनुसार, हाथी पपरा पहाड़ से होते हुए निम्नलिखित मार्गों से गुजर सकते हैं:
रामनगर तहसील के गांव: पठरा, भितरी, कोलडिहा, सेंदुरा, सोनाड़ी, बड़खोरा, देवरामोल्हाई, सोहौला, झिरिया, हिनौता, कुम्हरवार, मुन्नगहा, गैलाहरी, गोरसरी, देवराजनगर, कर्रा, मुहरवा, हटवा, जिगना
अमरपाटन वन्य क्षेत्र के गांव: अमझर, किरहाई, तेंदुहटा, भीषमपुर, ईटमा
अन्य संबद्ध क्षेत्र: बगदरी, गिधैला, मनकहरी, बाराखुर्द
वन विभाग की सलाह
वन विभाग ने निवासियों से निम्नलिखित एहतियात बरतने की अपील की है:
-
वन्य क्षेत्र में अकेले प्रवेश न करें
-
हाथियों को देखने पर तुरंत वन विभाग को सूचित करें
-
हाथियों के आसपास जाने से बचें
-
महुआ या अन्य अनाज संग्रहण स्थलों पर रात्रि में न रुकें
-
खेतों, मड़ैय्यों या घर के बाहर रात्रि विश्राम न करें
वन क्षेत्र संकट में
एडवाइजरी में गंभीर चिंता जताते हुए कहा गया है कि देश-प्रदेश के जंगलों का औद्योगिकरण और नगरीकरण वन्य प्राणियों के लिए काल बन चुका है। उनके प्राकृतिक भोजन और आश्रय स्थलों के विनष्ट होने से जंगली जीवन भोजन-पानी की तलाश में ग्रामीण परिक्षेत्रों की ओर पलायन कर रहे हैं।
इसका परिणाम यह हो रहा है कि या तो ये वन्य जीव लगातार दुर्घटनाओं का शिकार होकर मर रहे हैं या इंसानी ताकत इन्हें खत्म कर रही है। कभी-कभार मजदूर, श्रमिक या ग्रामीण इनके आक्रोश का शिकार हो जाते हैं।
पर्यावरण पर गंभीर सवाल
वन विभाग ने पर्यावरण संरक्षण पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार और विभाग हवादार, खुशबूदार पेड़-पौधे लगवाकर कोरम पूरा कर रहे हैं, वहीं फलदार पौधों की प्रजातियों की शोभा निजी या सरकारी उद्यानों तक ही सीमित रह गई है। प्राकृतिक परितंत्र को खत्म होने में मानवों की तथाकथित आधुनिक प्रजातियां भी खतरे में आ चुकी हैं।
समय रहते यदि वन्य क्षेत्रों में फलदार वृक्षों को आरोपित करने की दिशा में ध्यान नहीं दिया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। पहाड़ों को बचाने के साथ नदियों और प्राकृतिक जल स्रोतों को बचाकर ही मानव अपने भविष्य को सुरक्षित कर सकता है। सीमेंट और कंक्रीट के जंगल उगाकर शुद्ध हवा, पानी और पर्यावरण के लिए युद्ध छेड़ने से प्राकृतिक परिस्थितियों पर काबू पाने का सपना कभी साकार नहीं होगा।
Leave A Reviews