
जबलपुर शहर स्थित गोहलपुर थाना क्षेत्र के गाजी मियां मैदान में रविवार को एक बड़ा हादसा पेश आया। अचानक हाईटेंशन बिजली लाइन का तार टूटकर नीचे गिरने से तेज चिंगारियां उठीं, जिसने देखते ही देखते पास स्थित तीन गैरेज को अपनी चपेट में ले लिया। आग की लपटें इतनी भीषण थीं कि कुछ ही समय में गैरेज के भीतर रखा सारा कीमती सामान और वाहन उपकरण जलकर राख हो गए। इस घटना में पीड़ितों को लाखों रुपये के आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हाईटेंशन तार टूटने के बाद निकली चिंगारियों से आग तेजी से फैली और गैरेज में रखे ज्वलनशील सामान को अपनी जद में ले लिया। लपटें उठती देख आसपास मौजूद स्थानीय नागरिकों में अफरा-तफरी मच गई। लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर तुरंत आग पर काबू पाने के प्रयास शुरू किए। गनीमत यह रही कि रविवार का दिन होने के कारण मैदान में आम दिनों जैसी भारी भीड़ नहीं थी, जिससे एक बड़ा जानी नुकसान होने से टल गया। हालांकि, रोजी-रोटी का जरिया पूरी तरह नष्ट हो जाने से प्रभावित मैकेनिकों पर गहरा संकट आ खड़ा हुआ है।
हादसे के बाद गैरेज संचालकों ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। पीड़ित महफूज डेंटर और सुल्तान पेंटर ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि जर्जर तारों के टूटने से उनकी वर्षों की मेहनत और पूंजी कुछ ही मिनटों में खाक हो गई। पीड़ितों का कहना है कि यदि बिजली विभाग समय रहते इन ढीले और जर्जर तारों का मेंटेनेंस करता, तो इस बड़े हादसे को आसानी से टाला जा सकता था। प्रभावितों ने जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई और अपने पूरे नुकसान के मुआवजे की मांग उठाई है।
इस अग्निकांड ने बिजली वितरण कंपनी की मेंटेनेंस प्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि क्या इस हाईटेंशन लाइन की नियमित जांच की जा रही थी और क्या पहले भी इसके ढीले होने की शिकायतें दर्ज कराई गई थीं? सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन मेहनतकश लोगों की रोजी-रोटी और लाखों का सामान इस आग में स्वाहा हो गया, उनकी भरपाई कैसे होगी। अब सबकी नजरें प्रशासन और बिजली विभाग की जांच कार्रवाई पर टिकी हैं।
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