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मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होना पूर्व नियोजित कदम था : टी.एस. सिंह देव


जांजगीर-चांपा, 10 जून (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंह देव ने मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन को रद्द किए जाने के मामले को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और स्थापित नियमों के खिलाफ बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि नामांकन रद्द करने की कार्रवाई एक पूर्व नियोजित कदम प्रतीत होती है और इसके पीछे सुनियोजित षड्यंत्र की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

जांजगीर-चांपा, 10 जून (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंह देव ने मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन को रद्द किए जाने के मामले को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और स्थापित नियमों के खिलाफ बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि नामांकन रद्द करने की कार्रवाई एक पूर्व नियोजित कदम प्रतीत होती है और इसके पीछे सुनियोजित षड्यंत्र की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

सिंह देव ने कहा कि उन्हें विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी मिली है कि भोपाल में इस संबंध में पहले से ही तैयारियां की जा रही थीं। उनके अनुसार, नामांकन रद्द करने का निर्णय अचानक नहीं था, बल्कि एक रात पहले से ही इसकी रूपरेखा तैयार की जा रही थी। उन्होंने दावा किया कि जिस आधार पर नामांकन निरस्त किया गया, वह कानूनी रूप से पर्याप्त नहीं माना जा सकता।

उन्होंने कहा कि केवल किसी व्यक्ति द्वारा लीगल नोटिस दिए जाने भर से किसी उम्मीदवार की अयोग्यता सिद्ध नहीं होती।

सिंह देव के मुताबिक, इस प्रकार के कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं और ऐसे मामलों में उच्चतम न्यायालय के स्पष्ट निर्णय भी मौजूद हैं। इसके बावजूद संबंधित पीठासीन अधिकारी ने कथित तौर पर दबाव में आकर और किसी विशेष पक्ष को लाभ पहुंचाने की दृष्टि से मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया।

उन्होंने कहा कि यह निर्णय नियमों और प्रावधानों की भावना के विपरीत दिखाई देता है तथा इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

वहीं, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कांग्रेस अध्यक्ष न बन पाने को लेकर टी.एस. सिंह देव ने कहा कि इसे किसी साजिश के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह एक राजनीतिक गलतफहमी का परिणाम था। सिंह देव के अनुसार, गहलोत एक अनुभवी और परिपक्व नेता हैं। जब पार्टी नेतृत्व द्वारा निर्णय लिया जा चुका था और उन्हें अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करना था, तब उन्हें अन्य राजनीतिक परिस्थितियों को अलग रखते हुए सीधे नामांकन प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए थी।

--आईएएनएस

पीआईएम/एबीएम

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