
भोपाल। मध्य प्रदेश में आबकारी आरक्षक (Excise Constable) और अन्य पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षाओं में कथित बायोमेट्रिक फर्जीवाड़े और डमी अभ्यर्थियों के जरिए परीक्षा पास कराने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूरे मामले की सख्त जांच के निर्देश दिए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि योग्य अभ्यर्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।
प्रारंभिक जांच में आरोप सामने आए हैं कि कुछ मामलों में आधार कार्ड के बायोमेट्रिक डेटा में कथित रूप से फर्जी तरीके से बदलाव कर डमी कैंडिडेट (सॉल्वर गैंग) को परीक्षा में बैठाया गया। आशंका है कि इस तरीके से कुछ अभ्यर्थियों ने भर्ती परीक्षा में अनुचित लाभ हासिल किया।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जीवाड़ा किस स्तर तक हुआ और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर देते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की जाए। उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वाले किसी भी व्यक्ति, गिरोह या माफिया के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का कहना है कि ईमानदार और योग्य अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मामले में कथित फर्जीवाड़े में शामिल अभ्यर्थियों, सॉल्वर गैंग के सदस्यों और आधार में कथित रूप से फर्जी बायोमेट्रिक अपडेट करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
जांच एजेंसियां संबंधित दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच कर रही हैं।
पुलिस मुख्यालय और संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि चयनित अभ्यर्थियों के बायोमेट्रिक रिकॉर्ड और आधार हिस्ट्री (Aadhaar History) की गहन जांच की जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी फर्जी तरीके से चयनित अभ्यर्थी की पहचान कर उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।
सरकार का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता भी सुनिश्चित की जाएगी।
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