
इंदौर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने इंदौर एवं आसपास के अंचल की पर्यावरण सुरक्षा और जैव विविधता को लेकर एक अत्यंत ऐतिहासिक व महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। हाई कोर्ट ने सिमरोल, चोरल और बड़वाह वन क्षेत्र में रेलवे ट्रैक निर्माण के लिए प्रस्तावित ढाई लाख से अधिक पेड़ों की कटाई पर तत्काल प्रभाव से अंतरिम रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोकजे और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगल पीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए वन विभाग और पश्चिम रेलवे को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर को नियत की गई है।
अदालत में याचिकाकर्ता करण बैरागी की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता मनीष यादव ने चौंकाने वाले तथ्य रखे। उन्होंने अदालत को अवगत कराया कि रेलवे द्वारा इंदौर-खंडवा आमान परिवर्तन (गेज कन्वर्जन) परियोजना के अंतर्गत तैयार किए गए प्रारंभिक अलाइनमेंट और डिजाइन में महज 40 से 50 हजार पेड़ ही प्रभावित हो रहे थे।
किंतु, रेलवे प्रशासन ने तकनीकी चढ़ाई अधिक होने और सिमरोल से बड़वाह के बीच रेल यात्रा में 30 से 40 मिनट का समय बचाने का तर्क देते हुए ट्रैक के डिजाइन में फेरबदल कर दिया। डिजाइन में इस बदलाव के कारण कटने वाले पेड़ों की संख्या बढ़कर सीधे ढाई लाख (2.5 लाख) से अधिक पहुंच गई, जो समूचे क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है।
याचिका में प्रस्तुत आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, चोरल, सिमरोल और बड़वाह का यह सघन वन क्षेत्र वन्यजीवों की सघन उपस्थिति और समृद्ध जैव विविधता से परिपूर्ण है:
वन्यजीवों का घर: इस क्षेत्र में बाघों की आवाजाही और 37 पगमार्क तथा तेंदुओं के स्थायी आवास के प्रमाण वन विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज हैं। इसके अलावा चीतल, सांभर, लोमड़ी, मोर और जंगली खरगोश जैसे वन्यजीव यहां निरंतर स्वच्छंद विचरण करते हैं।
पर्यावरण संतुलन: चोरल के घने जंगल निमाड़ अंचल से आने वाली लू और गर्म हवाओं को रोककर इंदौर, महू और मालवा पठार के तापमान को नियंत्रित रखने में प्राकृतिक दीवार का कार्य करते हैं। पेड़ों के कटने से मालवा और निमाड़ के तापमान का प्राकृतिक अंतर समाप्त हो जाएगा।
दुर्लभ प्रजातियां: क्षेत्र में पर्यावरण संतुलन के लिए महत्वपूर्ण सलाई वृक्षों की संख्या पहले ही घट चुकी है। मालवा का आधा वन क्षेत्र नष्ट हो चुका है और करीब 58 स्थानीय वृक्ष प्रजातियां विलुप्ति की कगार पर हैं।
याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय से गुहार लगाई है कि इंदौर-खंडवा रेलवे प्रोजेक्ट और इस क्षेत्र से गुजरने वाले नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स से जुड़े सभी तकनीकी, वित्तीय व पर्यावरणीय दस्तावेज अदालत में तलब किए जाएं। साथ ही इस वन विनाश के मूल्यांकन और वैकल्पिक कम नुकसानदेह मार्गों के अध्ययन के लिए पर्यावरणविदों और तकनीकी विशेषज्ञों की एक स्वतंत्र समिति गठित की जाए। हाई कोर्ट द्वारा पेड़ों की कटाई पर रोक लगाए जाने से पर्यावरण प्रेमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और वन्यजीव संरक्षकों ने राहत की सांस ली है।
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