
भोपाल। प्रतियोगी परीक्षाओं और बोर्ड परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और संगठित परीक्षा माफिया पर प्रभावी कानूनी शिकंजा कसने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य शासन ने ऐसे अपराधों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश के चार प्रमुख महानगरों—भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर—में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट (त्वरित अदालतें) गठित करने का निर्णय लिया है। इन अदालतों का प्राथमिक लक्ष्य मामलों में पुलिस द्वारा आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल होने के मात्र तीन महीने (90 दिन) के भीतर ट्रायल पूरा कर फैसला सुनाना रखा गया है। राज्य सरकार के अनुसार, परीक्षा से जुड़े अपराधों के लिए इस प्रकार की समर्पित अदालतें गठित करने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक परीक्षा सुधार विजन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कड़े प्रशासनिक निर्देशों के अनुपालन में यह व्यवस्था धरातल पर उतारी गई है। सरकार का मुख्य ध्येय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में दिन-रात पसीना बहाने वाले लाखों ईमानदार युवाओं के हितों की रक्षा करना और चयन प्रक्रिया में जनता का भरोसा कायम रखना है। हालांकि, न्यायिक विशेषज्ञों का मानना है कि तीन माह में सुनवाई पूरी करना सरकार का एक प्रशासनिक लक्ष्य है, जिसे अदालती प्रक्रियाओं और गवाहियों की जटिलता के चलते शत-प्रतिशत मामलों के निपटारे की गारंटी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
प्रदेश के सभी 55 जिलों के परीक्षा संबंधी मुकदमों को भौगोलिक और प्रशासनिक आधार पर इन चार विशेष अदालतों में विभाजित किया गया है:
भोपाल फास्ट ट्रैक कोर्ट: राजधानी भोपाल सहित सीहोर, रायसेन, बैतूल, नर्मदापुरम, हरदा, राजगढ़ और विदिशा जिलों के मामलों की सुनवाई करेगी।
इंदौर फास्ट ट्रैक कोर्ट: इंदौर, धार, रतलाम, झाबुआ, मंदसौर, उज्जैन और देवास सहित मालवा व निमाड़ अंचल के जिलों को कवर करेगी।
ग्वालियर फास्ट ट्रैक कोर्ट: ग्वालियर, भिंड, मुरैना, शिवपुरी, गुना, दतिया, अशोकनगर और टीकमगढ़ जिलों से जुड़े मामलों का निपटारा करेगी।
जबलपुर फास्ट ट्रैक कोर्ट: जबलपुर, सागर, रीवा, सतना, छिंदवाड़ा, शहडोल सहित महाकौशल और बुंदेलखंड संभाग के शेष जिलों के प्रकरणों की सुनवाई करेगी।
मुकदमों की अदालती प्रक्रिया को गति देने और अभियोजन पक्ष को मजबूत करने के लिए शासन ने इन चारों अदालतों में अनुभवी 'विशेष अभियोजकों' (Special Public Prosecutors) की नियुक्ति की है। इनकी जिम्मेदारी साक्ष्यों को तकनीकी व फॉरेंसिक रूप से पुख्ता तरीके से पेश करने और गवाहों के समय पर बयान दर्ज कराने की होगी।
इसके साथ ही, परीक्षा से जुड़े जटिल अपराधों की जांच में गुणवत्ता और तेजी लाने के लिए संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) गठित करने के भी निर्देश दिए गए हैं। पुलिस विवेचना और अभियोजन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर तारीखों के लंबे सिलसिले को खत्म करने की योजना है।
हाल के वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं में पर्चा लीक और धांधली की घटनाओं ने लाखों योग्य अभ्यर्थियों के भविष्य पर संकट खड़ा किया है। मुकदमों के वर्षों तक लंबित रहने के कारण दोषियों के हौसले बुलंद होते थे। नई न्यायिक व्यवस्था से साक्ष्यों के आधार पर दोषियों को त्वरित सजा दिलाई जा सकेगी, जिससे नकल माफियाओं में कानूनी भय पैदा होगा और परीक्षा प्रणाली की शुचिता पुनः स्थापित हो सकेगी।
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