
भोपाल. मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और हलचल बढ़ाने वाली खबर सामने आ रही है। राज्य में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी (TET - Teacher Eligibility Test) को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के हालिया दिशा-निर्देशों और फैसले के बाद विभाग अब जुलाई या अगस्त के महीने में इस परीक्षा को आयोजित करने की संभावनाओं पर काम कर रहा है। इस बड़े फैसले का सीधा असर मध्य प्रदेश के डेढ़ लाख (1.5 लाख) से अधिक कार्यरत शिक्षकों के भविष्य पर पड़ सकता है।
लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) और स्कूल शिक्षा विभाग के स्तर पर परीक्षा के आयोजन को लेकर प्रारंभिक रूपरेखा तैयार की जा रही है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, न्यायालय के आदेशानुसार शिक्षा प्रणाली में पात्रता मानकों (Eligibility Standards) को सुनिश्चित करना अब अनिवार्य हो गया है।
इसी वजह से विभाग निम्नलिखित तकनीकी और प्रशासनिक तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा है:
परीक्षा का संभावित समय: जुलाई के अंतिम सप्ताह या अगस्त के शुरुआत में।
प्रशासनिक स्तर पर काम: परीक्षा केंद्रों (Exam Centers) का निर्धारण, नए पाठ्यक्रम (Syllabus) की समीक्षा और सुचारू संचालन व्यवस्था पर मंथन जारी है।
आधिकारिक नोटिफिकेशन: आने वाले कुछ ही दिनों में विभाग की ओर से परीक्षा का विस्तृत कार्यक्रम और गाइडलाइंस जारी की जा सकती हैं।
इस परीक्षा के आयोजन की खबर आते ही मध्य प्रदेश के शिक्षक संगठनों में चिंता, असमंजस और आक्रोश की स्थिति पैदा हो गई है। प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के कई शिक्षक संगठन इस फैसले के खिलाफ लामबंद (एकजुट) होने लगे हैं।
शिक्षक संगठनों का मुख्य तर्क: "साल 2010 से पहले जिन शिक्षकों की नियुक्तियां हुई थीं, वे उस समय सरकार द्वारा लागू किए गए तत्कालीन नियमों और वैधानिक प्रक्रियाओं के तहत ही की गई थीं। उन्होंने अपने जीवन के 15-20 साल सेवा में दे दिए हैं। ऐसे में इतने वर्षों की सेवा के बाद उन्हें दोबारा पात्रता परीक्षा (TET) के दायरे में खड़ा करना किसी भी नजरिए से व्यावहारिक और उचित नहीं है।"
शिक्षक नेताओं का साफ कहना है कि वे अपने सेवा अधिकारों (Service Rights) और भविष्य की सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेंगे। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने पुराने शिक्षकों को इस परीक्षा से छूट देने की स्पष्ट नीति नहीं बनाई, तो वे सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
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