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बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में महुआ बीनने गई महिला पर बाघ का हमला, मौत, भारी सुरक्षा के बीच हुआ अंतिम संस्कार


उमरिया जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (Bandhavgarh Tiger Reserve) से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ के कुदरी जंगल में महुआ बीनने गई एक महिला पर बाघ ने जानलेवा हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस दुखद घटना के बाद से पूरे क्षेत्र के ग्रामीणों में भारी दहशत और आक्रोश का माहौल है, जिसे देखते हुए प्रशासन द्वारा गांव और आसपास के संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

महुआ बीनने के दौरान हुआ अचानक हमला

जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक हादसा शुक्रवार को उस समय हुआ जब महिला रोज़मर्रा की तरह कुदरी वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जंगल में महुआ के फूल बीनने के लिए गई थी। इसी दौरान झाड़ियों में घात लगाकर बैठे एक बाघ ने महिला पर अचानक हमला कर दिया।

बाघ का हमला इतना जोरदार और अचानक था कि महिला को संभलने या शोर मचाने तक का मौका नहीं मिला और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। जब महिला काफी देर तक घर नहीं लौटी, तो ग्रामीणों ने उसकी तलाश शुरू की, जिसके बाद जंगल के अंदर उसका क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन तुरंत अलर्ट मोड पर आ गया।

कड़े पहरे और भारी सुरक्षा के बीच हुआ अंतिम संस्कार

शनिवार को मृतका का शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया। ग्रामीणों के बढ़ते आक्रोश और किसी भी संभावित अप्रिय स्थिति या हंगामे से बचने के लिए प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

अंतिम संस्कार के दौरान श्मशान घाट से लेकर पूरे गांव में भारी संख्या में पुलिस बल और वनकर्मी तैनात रहे। अधिकारियों की सूझबूझ और ग्रामीणों के सहयोग से आखिरकार मृतका का अंतिम संस्कार शांतिपूर्वक संपन्न करा दिया गया। हालांकि, गांव में अभी भी सन्नाटा और खौफ पसरा हुआ है।

बाघ को खदेड़ने के लिए हाथियों से गश्त

बाघ के इस हिंसक रुख को देखते हुए वन विभाग ने उसकी सघन निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। ग्रामीणों को दोबारा हमले से बचाने के लिए वन विभाग ने एक विशेष कार्यबल (Task Force) गठित किया है।

  • हाथियों से सर्चिंग: बाघ की सटीक लोकेशन का पता लगाने और उसे रिहायशी इलाके से दूर खदेड़ने के लिए दो प्रशिक्षित हाथियों की मदद ली जा रही है।

  • 20 सदस्यीय टीम तैनात: वन विभाग के लगभग 20 अनुभवी अधिकारियों और शूटरों की टीम को कुदरी जंगल के प्रभावित हिस्सों में तैनात किया गया है, जो लगातार सर्चिंग और पैदल गश्त कर रही है।

  • निगरानी केंद्र: गांव की सीमा से लगे जंगली रास्तों पर अस्थाई निगरानी चौकियां बनाई गई हैं ताकि बाघ की गतिविधियों पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा सके।

सुरक्षा को प्राथमिकता: वन परिक्षेत्र अधिकारी

इस पूरे मामले और सुरक्षा उपायों की जानकारी देते हुए पनपथा परिक्षेत्र अधिकारी रमेश सिंह पाटले ने बताया:

"हमारे लिए स्थानीय ग्रामीणों की जान और सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है। बाघ के हमले के बाद से ही क्षेत्र में लगातार गश्त (Patrolling) कराई जा रही है। हमारा पूरा अमला हाथियों और आधुनिक उपकरणों की मदद से बाघ की हर गतिविधि पर पैनी नजर बनाए हुए है। ग्रामीणों से भी अपील की गई है कि वे फिलहाल अकेले या तड़के सुबह जंगल की ओर रुख न करें।"

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