पटना, 3 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार में गंगा समेत कई प्रमुख नदियों के जलस्तर में लगातार वृद्धि और तेज कटाव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राज्य के कई जिलों में नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे निचले इलाकों में पानी फैलने लगा है।
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पटना, 3 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार में गंगा समेत कई प्रमुख नदियों के जलस्तर में लगातार वृद्धि और तेज कटाव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राज्य के कई जिलों में नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे निचले इलाकों में पानी फैलने लगा है।
पश्चिम चंपारण, भोजपुर, खगड़िया, भागलपुर, रोहतास सहित कई जिलों में बाढ़ और कटाव की स्थिति को देखते हुए प्रशासन अलर्ट है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर का निरीक्षण कर संभावित बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
सीएम ने कहा कि बाढ़ की स्थिति में आमजन को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए सभी व्यवस्थाएं समय रहते पूरी कर ली जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जन-धन की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार पटना के गांधीघाट में गंगा का जलस्तर गुरुवार सुबह छह बजे खतरे के निशान से 158 सेंटीमीटर ऊपर था और शुक्रवार सुबह तक इसमें 19 सेंटीमीटर की और वृद्धि की संभावना है। दीघाघाट में गंगा खतरे के निशान से 113 सेंटीमीटर और हाथीदह में 116 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। श्रीपालपुर में भी गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 219 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया।
सोन नदी भी कई स्थानों पर उफान पर है। पटना के मनेर में सोन का जलस्तर खतरे के निशान से 135 सेंटीमीटर ऊपर था। भोजपुर के कोइलवर में जलस्तर खतरे के निशान से 18 सेंटीमीटर नीचे दर्ज हुआ, जहां अगले 24 घंटे में कमी का अनुमान है।
गंगा के अलावा घाघरा, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती और कोसी के जलस्तर में भी वृद्धि दर्ज की गई है। गोपालगंज के डुमरियाघाट में गंडक खतरे के निशान से 70 सेंटीमीटर ऊपर थी। खगड़िया में बूढ़ी गंडक 61 सेंटीमीटर, जबकि बलतारा में कोसी 120 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। कटिहार के कुरसेला में कोसी 62 सेंटीमीटर ऊपर थी। सिवान के दरौली में घाघरा 21 सेंटीमीटर और भागलपुर के कहलगांव में गंगा 74 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी।
उधर, पश्चिम चंपारण में नेपाल के तराई क्षेत्र में लगातार बारिश से गंडक नदी का जलस्तर बढ़ गया है। योगापट्टी के सिसवा मंगलपुर, चौमुखा और जरलपुर में तेज कटाव के कारण 100 एकड़ से अधिक जमीन फसल समेत नदी में समा चुकी है। खगड़िया में गंगा, गंडक और बागमती के बढ़ते जलस्तर से निचले इलाकों में बाढ़ का दायरा बढ़ रहा है। भोजपुर के निचले क्षेत्रों में भी पानी फैल गया है।
कैमूर में कर्मनाशा नदी के उफान से बिहार-उत्तर प्रदेश के बीच संपर्क प्रभावित हुआ है। रोहतास में सोन नदी के बढ़े जलस्तर और बारिश से कई घरों में पानी घुस गया है।
इधर, उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने सिंचाई भवन स्थित कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से राज्य में बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पुनपुन और दरधा नदियों के बढ़ते जलस्तर, तटबंधों में टूट और कटाव वाले स्थानों की स्थिति की जानकारी ली गई। भागलपुर में तटबंध टूटने और कटाव को देखते हुए विभागीय टीम को अलर्ट रखा गया है।
पटना के जिलाधिकारी कुन्दन कुमार ने संवेदनशील तटबंधों की 24 घंटे निगरानी का निर्देश दिया है। उन्होंने ईसी बैग, नाइलन क्रेट, ट्रैक्टर, जेनरेटर और अन्य बाढ़ बचाव सामग्री पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रखने को कहा है। संभावित प्रभावित लोगों के लिए शरणस्थलों में पेयजल, शौचालय, प्रकाश, भोजन, दवाएं और सामुदायिक रसोई की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष इंतजाम करने को कहा गया है। जिला प्रशासन ने सुरक्षित नावों की व्यवस्था, पशु शिविर और चारा उपलब्ध कराने तथा 24 घंटे नियंत्रण कक्ष सक्रिय रखने के निर्देश दिए हैं। पटना में गेट नंबर 93 के समीप निरीक्षण के दौरान बताया गया कि पटना टाउन प्रोटेक्शन दीवार उच्चतम बाढ़ स्तर से 77 सेंटीमीटर ऊंची है और इसके ऊपर अतिरिक्त दो फीट लकड़ी की सुरक्षा व्यवस्था का प्रावधान है।
जल संसाधन विभाग के अनुसार, गुरुवार शाम चार बजे सोन बराज, इंद्रपुरी से करीब 4.45 लाख घनसेक, कोसी बराज, वीरपुर से 2.24 लाख घनसेक और गंडक बराज, वाल्मीकिनगर से 1.68 लाख घनसेक पानी दर्ज किया गया। सोन बराज का प्रवाह घटने की स्थिति में था, जबकि कोसी में बढ़ोतरी और गंडक में प्रवाह स्थिर बताया गया।
मौसम विभाग के मुताबिक, चार सितंबर तक नेपाल के महानंदा क्षेत्र तथा बिहार के महानंदा, सोन और उत्तर कोयल के जलग्रहण क्षेत्रों में हल्की से सामान्य बारिश की संभावना है। ऐसे में अगले 24 से 48 घंटे तक नदियों के जलस्तर पर प्रशासन और जल संसाधन विभाग की विशेष नजर बनी रहेगी।
--आईएएनएस
एमएनपी/एएसएच
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