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नागांव उपचुनाव: एआईयूडीएफ ने बदरुद्दीन अजमल को मैदान में उतारा, त्रिकोणीय मुकाबला तय


गुवाहाटी, 15 सितंबर (आईएएनएस)। ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) ने मंगलवार को पार्टी प्रमुख और बिन्नाकांडी के विधायक बदरुद्दीन अजमल को 6 अक्टूबर को होने वाले नगांव लोकसभा उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया। इससे यह मुकाबला भाजपा, कांग्रेस और एआईयूडीएफ के बीच त्रिकोणीय हो गया है।

गुवाहाटी, 15 सितंबर (आईएएनएस)। ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) ने मंगलवार को पार्टी प्रमुख और बिन्नाकांडी के विधायक बदरुद्दीन अजमल को 6 अक्टूबर को होने वाले नगांव लोकसभा उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया। इससे यह मुकाबला भाजपा, कांग्रेस और एआईयूडीएफ के बीच त्रिकोणीय हो गया है।

अजमल की उम्मीदवारी का ऐलान नॉमिनेशन भरने की आखिरी तारीख (16 सितंबर) से ठीक एक दिन पहले किया गया, जिससे इस हाई-प्रोफाइल उपचुनाव के लिए पार्टी की पसंद को लेकर चल रही अटकलें खत्म हो गईं।

एआईयूडीएफ ने पहले संकेत दिया था कि रेजौल करीम सरकार उनके उम्मीदवार हो सकते हैं, लेकिन आखिरकार उन्होंने अपने सुप्रीमो को सीधे चुनावी मैदान में उतारने का फैसला किया।

भाजपा ने पूर्व आईएएस अधिकारी देबाशीष शर्मा को मैदान में उतारा है, जिन्होंने सरकारी नौकरी से स्वैच्छिक रिटायरमेंट लेने के बाद सक्रिय राजनीति में कदम रखा और 8 सितंबर को भाजपा में शामिल हुए।

वहीं, कांग्रेस ने बटाद्रोबा की पूर्व विधायक शिबमोनी बोरा को उम्मीदवार बनाया है।

अब जब तीनों मुख्य उम्मीदवार मैदान में हैं, तो उम्मीद है कि नागांव में कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा, जिसमें वोटों का एकमुश्त मिलना और पारंपरिक विपक्षी वोट बैंक का बंटवारा अहम भूमिका निभा सकता है।

अजमल को मैदान में उतारने का एआईयूडीएफ का फैसला इसलिए अहम है क्योंकि उनकी राजनीतिक हैसियत है और असम में वोटरों के कुछ वर्गों के बीच पार्टी की मजबूत मौजूदगी है। उनकी उम्मीदवारी भाजपा और कांग्रेस, दोनों के चुनावी समीकरणों को बदल सकती है, खासकर अगर मुकाबला तीखे ध्रुवीकरण वाला होता है।

कांग्रेस के लिए अजमल का मैदान में आना एक और चुनौती है, क्योंकि पार्टी उस सीट को बनाए रखना चाहती है जिसे उसने पिछले दो लोकसभा चुनावों में जीता है। बोरा की उम्मीदवारी का मकसद पार्टी को नागांव-बटाद्रोबा इलाके से एक जाना-पहचाना राजनीतिक चेहरा देना था।

दूसरी ओर, भाजपा उस सीट पर अपना प्रभाव बढ़ाना चाहती है जहां कांग्रेस की मजबूत पकड़ रही है।

पूर्व सिविल सर्वेंट के तौर पर शर्मा का प्रशासनिक बैकग्राउंड और नागांव इलाके से उनकी जान-पहचान भाजपा के कैंपेन में अहम भूमिका निभा सकती है।

यह उपचुनाव तब जरूरी हो गया जब कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने नागांव लोकसभा सीट खाली कर दी और बाद में 2026 के असम विधानसभा चुनाव लड़ने से पहले भाजपा में शामिल हो गए।

नॉमिनेशन भरने की आखिरी तारीख 16 सितंबर है, जबकि उम्मीदवार 19 सितंबर तक अपना नॉमिनेशन वापस ले सकते हैं।

वोटिंग 6 अक्टूबर को होगी और वोटों की गिनती 9 अक्टूबर को की जाएगी।

उम्मीद है कि नतीजे 2029 के आम चुनाव से पहले मध्य असम के राजनीतिक मिजाज का अहम संकेत देंगे, जिससे नागांव राज्य के सबसे चर्चित चुनावी मुकाबलों में से एक बन जाएगा।

--आईएएनएस

एससीएच

Date & Time : 2026-09-16 00:00:03

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