
नरसिंहपुर। मर्यादा पुरुषोत्तम राम के पावन जीवन, उच्च आदर्शों और शाश्वत मानवीय मूल्यों पर केंद्रित नवीन काव्य संग्रह 'रामरस' का प्रथम आवरण पृष्ठ (कवर) शुक्रवार को सोशल मीडिया मंचों पर विधिवत जारी किया गया। इस पुस्तक के रचयिता नरसिंहपुर जिले के वरिष्ठ पत्रकार एवं कवि ललित श्रीवास्तव हैं। सोच पब्लिकेशन हाउस द्वारा प्रकाशित की जा रही यह कृति पाठकों को राम के जीवन-दर्शन, मर्यादा, त्याग, प्रेम, कर्तव्य, संघर्ष और गहन मानवीय संवेदनाओं से काव्यात्मक रूप में जोड़ने का एक अनूठा साहित्यिक प्रयास है।
काव्य संग्रह 'रामरस' में रामायण के विभिन्न पात्रों की महत्वपूर्ण भूमिका और उनके उदात्त योगदान पर प्रकाश डालने वाली प्रेरक रचनाओं का संकलन किया गया है। पुस्तक के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि राम के जीवन से जुड़े शाश्वत मूल्य आज के आधुनिक दौर में भी मानव समाज को जीवन के प्रत्येक मोड़ पर सही दिशा और नैतिक संबल प्रदान कर सकते हैं। यह पुस्तक पाठकों को केवल ऐतिहासिक प्रसंगों से ही नहीं जोड़ती, बल्कि समकालीन जीवन में उन मानवीय मूल्यों को आचरण में ढालने के लिए भी प्रेरित करती है।
पुस्तक के रचनाकार ललित श्रीवास्तव नरसिंहपुर जिले में एक लंबे अरसे से सक्रिय पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं। एक निष्पक्ष व प्रखर पत्रकार के रूप में पहचान रखने के साथ-साथ वे संवेदनशील काव्य प्रतिभा के भी धनी हैं। उनकी रचनाओं में भावनात्मक अभिव्यक्ति, भाषा का सहज प्रवाह और जीवन के यथार्थ पक्षों की सरल व मार्मिक प्रस्तुति स्पष्ट रूप से झलकती है। इससे पूर्व वर्ष 2023 में उनका पहला काव्य संग्रह 'हम दोनों हैं एक प्रिये' प्रकाशित और लोकार्पित हुआ था, जिसे पाठकों की भरपूर सराहना मिली थी। अब उनकी यह दूसरी कृति 'रामरस' पाठकों और साहित्य प्रेमियों के सम्मुख प्रस्तुत हो रही है।
रचनाकार ललित श्रीवास्तव के अनुसार 'रामरस' मात्र छंदों और कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि राम के उच्च आदर्शों को जनमानस के दैनिक जीवन से जोड़ने की एक आत्मीय साहित्यिक साधना है। शुक्रवार को सोशल मीडिया पर पुस्तक का कवर जारी होने के बाद से ही साहित्य जगत, बुद्धिजीवियों और आस्थावान पाठकों में इस नए काव्य संग्रह को लेकर विशेष उत्सुकता देखी जा रही है। प्रकाशक और लेखक की योजना के अनुसार, इस आगामी दीपावली के पावन पर्व पर पुस्तक का वैश्विक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अमेजॉन पर औपचारिक लोकार्पण किया जाएगा।
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