
नई दिल्ली। भारत और लैटिन अमेरिकी देश इक्वाडोर के बीच हाल ही में संपन्न हुई उच्च स्तरीय वार्ता के व्यापारिक और रणनीतिक परिणाम काफी सकारात्मक रहे हैं। दोनों देशों ने आपसी व्यापार में आने वाली तकनीकी और प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना पर चर्चा की है। इस यात्रा ने न केवल आर्थिक संबंधों को नई दिशा दी है, बल्कि स्वास्थ्य और तकनीक के क्षेत्र में भारत की वैश्विक भूमिका को और मजबूत किया है।
चर्चा के दौरान इक्वाडोर ने भारतीय बाजार में अपने प्रमुख कृषि उत्पादों जैसे केला, कोको और झींगा (Shrimp) के निर्यात के लिए बेहतर अवसर और रियायतें तलाशने पर जोर दिया। इसके जवाब में, भारत ने इक्वाडोर के ऊर्जा और खनन क्षेत्रों में गहरी रुचि दिखाई है। भारतीय कंपनियों द्वारा इक्वाडोर के प्राकृतिक संसाधनों में निवेश की संभावनाओं से दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू स्वास्थ्य सेवा और फार्मास्युटिकल क्षेत्र रहा। भारत ने इक्वाडोर को सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य: भारतीय दवाओं की पहुंच से इक्वाडोर की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पर वित्तीय बोझ कम होगा।
अनुसंधान: दोनों देशों ने जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) और चिकित्सा अनुसंधान में संयुक्त परियोजनाओं पर काम करने की प्रतिबद्धता जताई है।
तकनीकी मोर्चे पर भारत ने अपने सफल डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) जैसे UPI और आधार के अनुभवों को साझा करने की पेशकश की है। इक्वाडोर ने अपनी प्रशासनिक और वित्तीय प्रणालियों को आधुनिक बनाने के लिए भारतीय विशेषज्ञता का लाभ उठाने की इच्छा व्यक्त की है। इसके अतिरिक्त, दोनों देशों ने जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसे वैश्विक मुद्दों पर एक सुर में अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जो लैटिन अमेरिका में भारत की बढ़ती रणनीतिक पहुंच का प्रमाण है।
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