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नोएडा: एमएनसी में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, तीन आरोपी गिरफ्तार

ग्रेटर नोएडा, 13 मार्च (आईएएनएस)। ग्रेटर नोएडा के थाना बिसरख पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बहुराष्ट्रीय कंपनियों (एमएनसी) में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है।

ग्रेटर नोएडा, 13 मार्च (आईएएनएस)। ग्रेटर नोएडा के थाना बिसरख पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बहुराष्ट्रीय कंपनियों (एमएनसी) में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है।

पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से एक सीपीयू, एक मॉनिटर, एक की-बोर्ड, एक माउस, छह फर्जी जॉब ऑफर लेटर, तीन मोबाइल फोन और 7600 रुपये नकद बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विकास डाबर, अरुण कुमार और वैभव कुमार के रूप में हुई है।

ये तीनों मिलकर लोगों को अच्छी सैलरी वाली नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे मोटी रकम ऐंठते थे। इस संबंध में 12 मार्च को एक पीड़ित की लिखित शिकायत के आधार पर थाना बिसरख में मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की जांच के लिए पुलिस अधिकारियों के निर्देशन में टीम गठित की गई थी। इसी क्रम में 13 मार्च को पुलिस को गोपनीय सूचना मिली, जिसके आधार पर टीम ने इटेड़ा गोल चक्कर के पास सर्विस रोड से तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी विकास डाबर मूल रूप से हरियाणा के हिसार जिले का रहने वाला है और पहले विदेशी कंपनी यूएस हेल्थ केयर में क्लेम सेटलमेंट का काम करता था। उसके साथी अरुण कुमार और वैभव कुमार भी पहले विभिन्न निजी कंपनियों में काम कर चुके हैं। आरोपियों ने नौकरी तलाशने वाले लोगों का डाटा हासिल करने के लिए माईवर्कडेजॉब्स.कॉम वेबसाइट पर अपनी प्रोफाइल बना रखी थी।

इसके बाद ये लोग नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं से संपर्क कर उन्हें नामी बहुराष्ट्रीय कंपनियों में 30 हजार से 60 हजार रुपये मासिक वेतन वाली नौकरी दिलाने का लालच देते थे। सौदा तय होने पर ये वार्षिक पैकेज का करीब 15 से 20 प्रतिशत तक रकम लेने की बात करते थे और पहले टोकन मनी के रूप में 40 हजार से 60 हजार रुपये तक अपने खातों में ट्रांसफर करवा लेते थे।

आरोपी मेलहोस्टिंगआर और गूगल अकाउंट के जरिए बड़ी कंपनियों जैसी दिखने वाली फर्जी ई-मेल आईडी बनाते थे। इसके बाद अपने कंप्यूटर से संबंधित कंपनियों के लोगो के साथ फर्जी जॉब ऑफर लेटर तैयार कर ई-मेल के माध्यम से अभ्यर्थियों को भेज देते थे। ऑफर लेटर मिलने के बाद अभ्यर्थियों को भरोसा हो जाता था और वे बाकी रकम भी ऑनलाइन ट्रांसफर कर देते थे। जब पीड़ित नौकरी के बारे में जानकारी मांगते थे तो आरोपी तकनीकी कारण या दस्तावेजों की कमी का बहाना बनाकर उन्हें नई तारीख दे देते थे या किसी दूसरी कंपनी का फर्जी ऑफर लेटर भेजकर गुमराह करते रहते थे।

पूछताछ में आरोपियों से पता चला है कि वे इस तरीके से कई लोगों से लाखों रुपये की ठगी कर चुके हैं। मोबाइल फोन के जरिए वे पीड़ितों से संपर्क करते थे और डिजिटल पेमेंट ऐप के माध्यमों से पैसे लेते थे। फिलहाल पुलिस आरोपियों के बैंक खातों और अन्य लेनदेन की जांच कर रही है, ताकि इस गिरोह से जुड़े अन्य मामलों का भी खुलासा किया जा सके।

--आईएएनएस

पीकेटी/डीएससी

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