
इस्लामाबाद. ईरान और अमेरिका के बीच दशकों बाद हो रही सबसे बड़ी शांति वार्ता के लिए ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ एक भावुक संदेश के साथ पाकिस्तान पहुंचे हैं. गालिबाफ ने सोशल मीडिया (X) पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें उनके विमान की सीटों पर उन बच्चों की तस्वीरें रखी थीं, जो 28 फरवरी 2026 को ईरानी शहर मिनाब के एक प्राइमरी स्कूल पर हुए मिसाइल हमले में मारे गए थे.
तस्वीरों के साथ स्कूल बैग और फूल रखे हुए थे, जो इस बात का प्रतीक थे कि ईरान बातचीत की मेज पर इन मासूमों की मौत का हिसाब और न्याय चाहता है.
क्या था मिनाब स्कूल हमला?
युद्ध के शुरुआती दौर में 28 फरवरी को मिनाब के शजरेह तैयबा गर्ल्स स्कूल पर तीन मिसाइलें गिरी थीं. इस भीषण हमले में 175 से अधिक लोगों की जान गई थी, जिनमें अधिकांश 7 से 12 साल की मासूम बच्चियां थीं. हालांकि अमेरिका ने इसे 'इंटेलिजेंस की गलती' बताया था, लेकिन ईरान इसे युद्ध अपराध मानता है.
इस्लामाबाद वार्ता: जेडी वेंस और गालिबाफ की मुलाकात
महत्वपूर्ण बैठक: अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस वार्ता के लिए इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं. 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद यह दोनों देशों के बीच उच्चतम स्तर की सीधी बातचीत है.
ईरान की शर्तें: ईरान ने बातचीत शुरू करने से पहले दो शर्तें रखी हैं- लेबनान में तुरंत सीजफायर और अमेरिका द्वारा फ्रीज की गई ईरानी संपत्ति को बहाल करना.
ट्रम्प का रुख: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि ईरान के पास 'होरमुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को ब्लॉक करने के अलावा कोई कार्ड नहीं बचा है. उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि वार्ता सफल नहीं हुई, तो सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू होगी.
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