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पाकिस्तान की सामाजिक और कानूनी व्यवस्था में 'ऑनर किलिंग' पर रोक-टोक नहीं, लगातार बढ़ रहे मामले: रिपोर्ट

कोलंबो, 15 मार्च (आईएएनएस)। पूरे पाकिस्तान में 'ऑनर किलिंग' थमने का नाम नहीं ले रही है। ऐसी घटनाओं पर समाज की चुप्पी और कानूनी व्यवस्था में झोल को कारण बताया जा रहा है। ये एक ऐसे कानूनी ढांचे को दर्शाता है, जिसने लंबे समय से अपराधियों को 'धार्मिक न्याय' की आड़ में बच निकलने का रास्ता मुहैया कराया है।

कोलंबो, 15 मार्च (आईएएनएस)। पूरे पाकिस्तान में 'ऑनर किलिंग' थमने का नाम नहीं ले रही है। ऐसी घटनाओं पर समाज की चुप्पी और कानूनी व्यवस्था में झोल को कारण बताया जा रहा है। ये एक ऐसे कानूनी ढांचे को दर्शाता है, जिसने लंबे समय से अपराधियों को 'धार्मिक न्याय' की आड़ में बच निकलने का रास्ता मुहैया कराया है।

अलग-अलग प्रांतों और सामाजिक वर्गों से जुड़े ये मामले एक ऐसी सच्चाई को उजागर करते हैं जो परेशान करने वाली है। एक रिपोर्ट के अनुसार, कानूनी सुधारों और जनता के गुस्से के बावजूद, पाकिस्तान के सामाजिक ताने-बाने में ये भयानक हत्याएं अभी भी गहरी जड़ें जमाए हुए हैं।

श्रीलंका के अखबार 'डेली मिरर' की एक रिपोर्ट में इस पर विस्तार से रोशनी डाली गई है। इसके अनुसार, "सोशल मीडिया सेलिब्रिटी कंदील बलोच की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी, और उसको दस साल बीत चुके हैं; उसके भाई ने 'ऑनर किलिंग' को चुना था। उनकी हत्या ने पूरे पाकिस्तान को झकझोर कर रख दिया था, और इसके चलते ऐसे कानूनी सुधार हुए, जिन्होंने ऑनर किलिंग को 'मानवता के खिलाफ अपराध' की श्रेणी में डाल दिया। इसके बाद पुलिस ने पाकिस्तान दंड संहिता (पीपीसी) की धारा 302 और 311 के तहत ऐसे मामले दर्ज करना शुरू कर दिया। 2016 में कानून में किए गए संशोधनों के बावजूद, यह हिंसा कम नहीं हुई है। बल्कि, लोग बेखौफ अंदाज में अपनी करतूतों को अंजाम दे रहे हैं।"

रिपोर्ट में आगे कहा है, "पाकिस्तानी समाज में पितृसत्ता, लैंगिक भेदभाव, महिलाओं के प्रति बढ़ती नफरत और 'टॉक्सिक मैस्कुलिनिटी' (पुरुषों की गलत सोच) ही उन धारणाओं को बनाए रखने के मुख्य कारण हैं, जिनके अनुसार 'इज्जत या बेइज्जती' का संबंध महिलाओं से जोड़ा जाता है।"

अमेरिका स्थित एक मानवाधिकार संगठन, 'ह्यूमन राइट्स वॉच' का हवाला देते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान में हर साल लगभग एक हजार महिलाओं की 'इज्जत' के नाम पर हत्या कर दी जाती है—और कानूनी सुधारों के बावजूद, यह आंकड़ा लगभग वैसा का वैसा ही बना हुआ है।

जुलाई 2025 में, सोशल मीडिया पर एक भयानक वीडियो वायरल हुआ। इस वीडियो में एक युवा जोड़े को मौत के घाट उतारते हुए दिखाया गया था; इन दोनों ने अपने परिवारों की मर्जी के खिलाफ जाकर शादी की थी। रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान में एक 'कबीलाई जिरगा' (पंचायत) के आदेश पर इस बेनाम जोड़े की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

रिपोर्ट में बताया गया है, "वह फुटेज बेहद रोंगटे खड़े कर देने वाला था: शॉल ओढ़े वह महिला बिल्कुल बेजान खड़ी थी, तभी एक आदमी ने बहुत करीब से उस पर गोली चला दी। दो गोलियां लगने के बाद भी वह खड़ी रही, और तीसरी गोली लगने के बाद ही वह जमीन पर गिरी। कुछ ही पलों बाद, कैमरे में उसके शव के पास एक खून से लथपथ पुरुष भी जमीन पर पड़ा हुआ दिखाई दिया। जमीन पर पड़े उन दोनों पर बंदूकधारियों ने लगातार गोलियां बरसाईं।"

आगे बताया गया है कि इस वीडियो के सामने आने के बाद पूरे देश में भारी गुस्सा भड़क उठा, और पाकिस्तान भर में 'जस्टिस फॉर कपल' (जोड़े के लिए इंसाफ) और ऑनर किलिंग जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।

रिपोर्ट में कहा गया है, "सांसदों ने हत्याओं की निंदा की और जिरगा बुलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, साथ ही चेतावनी दी कि इस तरह की समानांतर न्याय प्रणालियों को छूट देने से हिंसा और बढ़ जाती है। इन हत्याओं ने बलूचिस्तान जैसे कम शासित क्षेत्रों में नागरिकों की सुरक्षा करने में राज्य की विफलता को उजागर किया है, जहां अदालतों की अनुपस्थिति और अप्रभावी पुलिस व्यवस्था के कारण जनजातीय सत्ता संरचनाएं हावी हो जाती हैं।"

पाकिस्तान भर में ऑनर किलिंग के खतरे को उजागर करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है, "वास्तविकता यह है कि राज्य की उदासीनता ने उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर के क्षेत्रों में जिरगाओं को फलने-फूलने दिया है। कानून लागू करने के बजाय, सरकार ने पिछले एक साल में न्यायपालिका को कमजोर करने और यहां तक ​​कि पूर्व जनजातीय जिलों में जिरगाओं को पुनर्जीवित करने पर विचार करने में बिताया है।"

--आईएएनएस

केआर/

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