
वाशिंगटन/इस्लामाबाद. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वैश्विक राजनीति में एक बड़ा धमाका करते हुए दावा किया है कि ईरान अपने संवर्धित (Enriched) यूरेनियम का पूरा भंडार अमेरिका को सौंपने के लिए सहमत हो गया है. व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रम्प ने संकेत दिया कि सालों से जारी तनाव अब एक ऐतिहासिक शांति समझौते के बेहद करीब है.
इस्लामाबाद बन सकता है शांति का केंद्र
ट्रम्प ने पाकिस्तान की मध्यस्थता की सराहना करते हुए कहा कि यदि इस 'मेगा डील' पर हस्ताक्षर इस्लामाबाद में होते हैं, तो वह खुद पाकिस्तान की यात्रा करेंगे. उन्होंने कहा, "पाकिस्तान के मध्यस्थों ने बहुत अच्छा काम किया है. अगर डील वहां साइन हुई, तो मैं जरूर जाऊंगा."
समझौते से क्या बदलेगा?
ट्रम्प के मुताबिक, इस डील के सफल होने से न केवल परमाणु युद्ध का खतरा टलेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी बड़ी राहत मिलेगी:
सस्ते तेल की उम्मीद: ट्रम्प ने दावा किया कि समझौते के बाद तेल की सप्लाई सामान्य हो जाएगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें गिरेंगी.
होर्मुज स्ट्रेट: दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' पूरी तरह सुरक्षित और खुला रहेगा.
प्रतिबंधों में ढील: बातचीत सफल रही तो ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंध हटाए जा सकते हैं.
इज़राइल-लेबनान के बीच 10 दिन का युद्धविराम
इसी बीच, एक और बड़ी कूटनीतिक जीत का दावा करते हुए ट्रम्प ने बताया कि इज़राइल और लेबनान 10 दिन के सीजफायर पर राजी हो गए हैं. यह युद्धविराम गुरुवार देर रात (भारतीय समयानुसार 3:30 बजे) से प्रभावी हो गया है. ट्रम्प ने इसके लिए इज़राइली पीएम नेतन्याहू और लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन से सीधे बात की थी.
ईरान का पलटवार
हालांकि, ट्रम्प के इन दावों पर ईरान की ओर से संशय बना हुआ है. ईरानी मीडिया ने इन दावों को 'हवाई किले' करार दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि 60% तक शुद्ध किए जा चुके यूरेनियम को छोड़ना ईरान के लिए एक कठिन फैसला होगा, क्योंकि 90% शुद्धता पर यह परमाणु हथियार बनाने के काम आता है.
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