
कच्छ। गुजरात के कच्छ जिले में भारत-पाकिस्तान समुद्री सीमा के पास एक लावारिस पाकिस्तानी नाव मिलने से सुरक्षा एजेंसियों के बीच हड़कंप मच गया है। 'ऑपरेशन सिंधु' की वर्षगांठ से ठीक पहले मिली इस संदिग्ध नाव ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। सीमा सुरक्षा बल (BSF) के सूत्रों के अनुसार, यह नाव क्रीक क्षेत्र में गश्त के दौरान परित्यक्त अवस्था में पाई गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए बीएसएफ ने पूरे इलाके में निगरानी और गश्त तेज कर दी है।
मछली पकड़ने के उपकरण बरामद, जांच जारी प्रारंभिक जांच में नाव की तलाशी के दौरान उसमें से मछली पकड़ने के जाल और अन्य उपकरण बरामद हुए हैं। हालांकि, अभी तक नाव से कोई भी हथियार या अन्य संदिग्ध सामग्री नहीं मिली है। अधिकारी इस बात की बारीकी से जांच कर रहे हैं कि नाव को कब और किन परिस्थितियों में वहां छोड़ा गया। बीएसएफ के जवान नियमित गश्त कर रहे थे, तभी उनकी नजर इस नाव पर पड़ी। इसके बाद तुरंत बैकअप टीमों को बुलाया गया और आसपास के सभी संभावित क्षेत्रों में सघन तलाशी अभियान (Search Operation) छेड़ दिया गया है।
पाकिस्तानी मछुआरों की घुसपैठ की आशंका सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अरब सागर के इस दुर्गम क्रीक क्षेत्र में पाकिस्तानी मछुआरे अक्सर अवैध रूप से भारतीय जल सीमा में घुसपैठ करते हैं। कई बार बीएसएफ की गश्ती टीम को देखते ही पकड़े जाने के डर से ये मछुआरे अपनी नाव वहीं छोड़ देते हैं और छोटी नावों या तैरकर वापस पाकिस्तानी सीमा की ओर भाग जाते हैं। चूंकि यह क्षेत्र संवेदनशील है और भारतीय मछुआरों के प्रवेश पर भी यहाँ कड़ा प्रतिबंध है, इसलिए सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहती हैं।
सुरक्षा व्यवस्था की गई चाक-चौबंद घटना के बाद से ही तटीय सुरक्षा से जुड़ी सभी एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं। हर संभावित खतरे को समय रहते भांपने के लिए तकनीकी निगरानी के साथ-साथ जमीनी गश्त भी बढ़ा दी गई है। स्थानीय खुफिया तंत्र को भी सक्रिय कर दिया गया है ताकि सीमा पार से होने वाली किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल सूचना मिल सके। फिलहाल, मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है और सुरक्षा बल स्थिति पर पूरी तरह से नजर बनाए हुए हैं।
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