
पन्ना जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ सागर लोकायुक्त पुलिस ने गुरुवार को एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना के डूब क्षेत्र में अधिग्रहित जमीन का उचित मुआवजा दिलाने और राशि बढ़वाने के एवज में 47 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए पटवारी संतोष चिकवा को लोकायुक्त की टीम ने रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पटवारी ने यह रकम जिला अस्पताल गेट के सामने ली और जैसे ही उसने नोटों की गड्डी अपनी बाइक की डिग्गी में रखी, सादी वर्दी में तैनात लोकायुक्त दल ने उसे मौके पर ही दबोच लिया।
शिकायतकर्ता पीड़ित किसान दयाराम आदिवासी के अनुसार, उसकी चार अलग-अलग खातों की पैतृक भूमि केन-बेतवा लिंक परियोजना के डूब क्षेत्र में अधिगृहीत की गई है। इस भूमि का सरकारी मुआवजा स्वीकृत कराने, राशि में इजाफा कराने तथा परिजनों के मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार करने के नाम पर हल्का पटवारी संतोष चिकवा लगातार पैसों की मांग कर रहा था। पटवारी ने कुल 80 हजार रुपए की अवैध रिश्वत मांगी थी, जिसमें से 30 हजार रुपए वह पहले ही वसूल चुका था। शेष 50 हजार में से 47 हजार रुपए की अंतिम किस्त देने की बात तय हुई थी। लगातार दबाव से तंग आकर पीड़ित ने सागर लोकायुक्त एसपी के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के प्राथमिक सत्यापन के बाद लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर ट्रैप दल का गठन किया गया। योजनाबद्ध तरीके से गुरुवार को पीड़ित दयाराम आदिवासी को केमिकल (फिनॉल्फ्थलीन पाउडर) लगे 47 हजार रुपए के नोट देकर पटवारी से संपर्क करने भेजा गया। पटवारी संतोष चिकवा ने पीड़ित को पन्ना जिला अस्पताल के गेट के पास बुलाया। जैसे ही पटवारी ने रिश्वत की रकम अपने हाथों में लेकर अपनी मोटरसाइकिल की डिग्गी में रखी, आसपास घेराबंदी कर खड़े लोकायुक्त अधिकारियों ने उसे पकड़ लिया। मौके पर जब रासायनिक प्रक्रिया के तहत पटवारी के हाथ धुलवाए गए, तो पानी का रंग तुरंत गुलाबी हो गया। तलाशी लेने पर डिग्गी से पूरी रिश्वत राशि बरामद कर ली गई।
कार्रवाई पूरी करने के बाद लोकायुक्त पुलिस टीम आरोपी पटवारी को पन्ना कोतवाली थाने लेकर पहुंची, जहां कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। सागर लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी पटवारी संतोष चिकवा के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (संशोधित 2018) की विभिन्न सुसंगत धाराओं के तहत आपराधिक मामला पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी है। लोकायुक्त अधिकारियों ने कहा कि विस्थापन और डूब क्षेत्र के किसानों को राहत राशि दिलाने में इस प्रकार की वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामले में संबंधित तहसील कार्यालय के अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है।
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