
पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव अपने बेबाक और अक्सर विवादित बयानों के कारण एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक मुश्किलों में घिर गए हैं। महिला आरक्षण और राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को लेकर की गई एक बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद बिहार राज्य महिला आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
हाल ही में संसद में 131वां संवैधानिक संशोधन विधेयक 2026 (महिला आरक्षण बिल) के गिर जाने के बाद पप्पू यादव ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए मर्यादा की सीमाएं लांघ दीं। एक वायरल वीडियो में उन्हें यह कहते सुना गया कि "देश में 90% महिलाओं का राजनीतिक करियर किसी नेता के बेडरूम (बिस्तर) से शुरू होता है।" उनके इस बयान ने न केवल राजनीतिक गलियारों में बल्कि सामाजिक स्तर पर भी भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।
सांसद के इस अपमानजनक बयान का संज्ञान लेते हुए बिहार राज्य महिला आयोग ने उन्हें नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा है। आयोग ने अपने बयान में कहा, "सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में आपने महिला राजनेताओं के आत्मसम्मान और सामाजिक गरिमा को गहरी चोट पहुँचाई है।"
आयोग ने सख्त लहजे में पप्पू यादव से पूछा है कि उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई क्यों न की जाए और लोकसभा अध्यक्ष से उनकी सदस्यता रद्द करने की सिफारिश क्यों न की जाए। भाजपा नेता शहजाद पूनावाला सहित कई राजनीतिक हस्तियों ने इसे समस्त 'नारी शक्ति' का अपमान बताते हुए पप्पू यादव से सार्वजनिक माफी की मांग की है।
पप्पू यादव का गुस्सा केवल महिला आरक्षण तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा पर भी तीखा व्यक्तिगत हमला किया। उन्होंने मुख्यमंत्री की तुलना "चिंपांजी" और "कुत्ते" से करते हुए उन्हें 'वनमानुष' तक कह डाला। सांसद ने कहा कि जो नेता बड़े मुद्दों पर बोलने वालों को दबाते हैं, उनकी स्थिति सड़क पर भौंकने वालों जैसी होती है।
महिला आरक्षण बिल के गिरने पर पप्पू यादव ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ने बिना व्यापक चर्चा और राज्यों से परामर्श के इस बिल को पेश किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ओबीसी, ईबीसी, एससी-एसटी और अल्पसंख्यक महिलाओं को उचित हिस्सेदारी न देना एक बड़ी साजिश है। हालांकि, उनके "बेडरूम" वाले कमेंट ने इन तर्कों को पीछे छोड़ते हुए विवाद को जन्म दे दिया है।
फिलहाल, पप्पू यादव ने आयोग के नोटिस का औपचारिक जवाब नहीं दिया है, लेकिन उनके इस बयान ने बिहार की राजनीति में उबाल ला दिया है। महिला संगठनों ने जगह-जगह उनके पुतले फूंके हैं और उन्हें महिला विरोधी मानसिकता वाला करार दिया है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पप्पू यादव अपने शब्दों के लिए खेद जताएंगे या आयोग उनके खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर कठोर कार्रवाई की मांग करेगा।
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