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पश्चिम बंगाल: परिसीमन पूरा नहीं हो पाने से निकाय चुनाव में हो सकती है एक महीने की देरी


कोलकाता, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (केएमसी) और हावड़ा म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (एचएमसी) समेत सात शहरी निकाय के लिए वोटिंग में लगभग एक महीने की देरी हो सकती है। पश्चिम बंगाल राज्य चुनाव आयोग के सूत्रों की ओर से यह जानकारी सामने आई है।

कोलकाता, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (केएमसी) और हावड़ा म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (एचएमसी) समेत सात शहरी निकाय के लिए वोटिंग में लगभग एक महीने की देरी हो सकती है। पश्चिम बंगाल राज्य चुनाव आयोग के सूत्रों की ओर से यह जानकारी सामने आई है।

शुरुआती शेड्यूल के मुताबिक, सात सिविक बॉडीज के लिए वोटिंग नवंबर के आखिरी हफ्ते में होने की उम्मीद थी, और नतीजे दिसंबर के पहले हफ्ते में आने थे। हालांकि, अधिकारियों ने बताया कि डिलिमिटेशन से जुड़ा वोटर रीअरेंजमेंट का काम अभी भी कुछ वार्ड में अधूरा है।

पश्चिम बंगाल राज्य चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक, केएमसी एरिया के करीब 100 वार्ड में वार्ड-वाइज वोटर रीडिस्ट्रिब्यूशन प्रोसेस अभी भी बाकी है और इसे पूरा होने में और समय लगने की उम्मीद है। इस वजह से, दिसंबर के तीसरे या चौथे हफ्ते से पहले चुनाव कराना मुमकिन नहीं है।

पश्चिम बंगाल राज्य चुनाव आयोग के एक सूत्न ने कहा, "दिसंबर के तीसरे हफ्ते तक प्रोसेस पूरा करने की पूरी कोशिश की जाएगी ताकि साल खत्म होने से पहले काउंटिंग प्रोसेस और रिज़ल्ट का ऐलान पूरा हो सके। हालांकि, अगर वोटिंग दिसंबर के आखिरी हफ्ते में होती है, तो रिजल्ट अगले साल जनवरी के पहले हफ़्ते से पहले घोषित कर दिए जाएंगे।"

इस मुद्दे पर मंगलवार को पश्चिम बंगाल राज्य चुनाव आयोग द्वारा बुलाई गई ऑल-पार्टी मीटिंग में चर्चा हुई। ज्यादातर विपक्षी पार्टियों ने कमीशन से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) एक्सरसाइज से पहले मौजूद वोटर लिस्ट का इस्तेमाल करके चुनाव कराने की अपील की, और आरोप लगाया कि रिवीजन प्रोसेस के दौरान कई एलिजिबल वोटर बाहर हो गए थे।

सूत्रों के मुताबिक, ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस, सीपीआई(एम) के लेफ्ट फ्रंट और कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने चिंता जताई कि रिवीजन प्रोसेस के दौरान बड़ी संख्या में वोटर्स के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे।

तीन राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने दावा किया कि एसआईआर प्रोसेस के दौरान कई योग्य वोटर्स के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे, और उनमें से कई का भविष्य अपीलेट ट्रिब्यूनल के आखिर में लटका हुआ है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में अगर शहरी निकायों के लिए पोलिंग एसआईआर के बाद की वोटर लिस्ट के आधार पर की जाती है, तो यह उन वोटर्स के साथ गलत होगा।

--आईएएनएस

एसडी/पीएम

Date & Time : 2026-10-28 13:45:05

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