
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका में आरोप लगाया गया है कि 26 भारतीय नागरिकों को नौकरी का लालच देकर रूस भेजा गया, जहां उनके पासपोर्ट छीनकर उन्हें रूस-यूक्रेन युद्ध में जबरन शामिल होने के लिए मजबूर किया गया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि इन भारतीयों को हिरासत में रखा गया है और उनकी स्थिति को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। याचिका में केंद्र सरकार से मांग की गई है कि वह भारतीय दूतावास के माध्यम से तत्काल राजनयिक और कॉन्सुलर प्रयास करे, ताकि प्रभावित नागरिकों की लोकेशन, कानूनी स्थिति और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
याचिका में वियना कन्वेंशन ऑन कॉन्सुलर रिलेशंस के तहत इन भारतीयों तक राजनयिक पहुंच सुनिश्चित करने और उनके अधिकारों की रक्षा करने की मांग भी की गई है। साथ ही, उनकी सुरक्षित स्वदेश वापसी, परिवारों से संपर्क, चिकित्सा सुविधा और कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश देने की अपील की गई है।
इसके अलावा, केंद्र सरकार से यह भी कहा गया है कि वह एक हलफनामा दाखिल कर बताए कि विदेशों में फंसे भारतीयों के मामलों में वह किस तरह के प्रोटोकॉल और प्रक्रिया अपनाती है। याचिका में राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में सक्रिय अवैध भर्ती एजेंटों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और जांच की भी मांग की गई है।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से तुषार मेहता ने अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। कोर्ट ने सरकार को निर्देश लेने के लिए समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई इस महीने के अंत में तय की है।
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