जयपुर, 7 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर जयपुर में आयोजित ब्रिक्स व्यापार एवं उद्योग मंत्रियों की बैठक में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों को हस्तनिर्मित जयपुर सांगानेरी शॉल भेंट करके भारत की समृद्ध हथकरघा विरासत को उजागर किया।
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जयपुर, 7 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर जयपुर में आयोजित ब्रिक्स व्यापार एवं उद्योग मंत्रियों की बैठक में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों को हस्तनिर्मित जयपुर सांगानेरी शॉल भेंट करके भारत की समृद्ध हथकरघा विरासत को उजागर किया।
इस भावार्थ को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए गोयल ने लिखा, “गर्व से भारतीय, गर्व से सांगानेरी।” उन्होंने कहा कि राजस्थान की सदियों पुरानी वस्त्र परंपरा और स्थानीय कारीगरों की शिल्पकारी को श्रद्धांजलि के रूप में उन्होंने इन हस्तनिर्मित शॉल को उपस्थित मंत्रियों और प्रतिनिधियों को भेंट किया।
गोयल ने लिखा, “राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर, मैंने ब्रिक्स इंडिया 2026 व्यापार एवं उद्योग मंत्रियों की बैठक में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों को सुंदर हस्तनिर्मित जयपुर सांगानेरी शॉल भेंट किए। हमारे कुशल कारीगर अद्वितीय, कालातीत शिल्पकारी की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।”
सांगानेरी शॉल की प्रतीकात्मक प्रस्तुति भारत द्वारा 2026 में अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत आयोजित 16वीं ब्रिक्स व्यापार मंत्रियों की बैठक के सफल समापन के साथ हुई।
इस बैठक में ब्रिक्स के सभी सदस्य देशों के व्यापार मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने आर्थिक सहयोग को मजबूत करने, आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ बनाने और बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली में सुधार लाने पर चर्चा की।
अपनी जटिल हस्त-ब्लॉक प्रिंटिंग, प्राकृतिक रंगों और सुंदर पुष्प आकृतियों के लिए प्रसिद्ध सांगानेरी शॉल, राजस्थान की सबसे प्रतिष्ठित पारंपरिक शिल्पकलाओं में से एक हैं।
जयपुर के पास स्थित सांगानेर से उत्पन्न यह वस्त्र कला अपनी विशिष्ट कारीगरी के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कर चुकी है और हजारों कारीगर परिवारों को आजीविका प्रदान करती आ रही है।
प्रस्तुति में भारत सरकार द्वारा 'वोकल फॉर लोकल' पहल के तहत स्वदेशी शिल्पकला और हथकरघा उत्पादों को बढ़ावा देने पर दिए जा रहे जोर को भी दर्शाया गया।
हर साल 7 अगस्त को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय हथकरघा दिवस, भारत की सदियों पुरानी बुनाई परंपराओं का सम्मान करता है और देश की सांस्कृतिक और आर्थिक विरासत में हथकरघा बुनकरों और कारीगरों के योगदान को मान्यता देता है।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों के लिए आधिकारिक उपहार के रूप में स्थानीय स्तर पर निर्मित सांगानेरी शॉल का चयन करके, भारत ने न केवल राजस्थान की कलात्मक उत्कृष्टता का प्रदर्शन किया, बल्कि वैश्विक मंचों पर पारंपरिक शिल्पकलाओं को संरक्षित करने और उन्हें बढ़ावा देने के प्रति देश की प्रतिबद्धता को भी दर्शाया।
इस पहल ने स्थानीय कारीगरों को समर्थन देने के संदेश को और मजबूत किया और ब्रिक्स समूह में भारत की बढ़ती नेतृत्व भूमिका के साथ-साथ उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी उजागर किया।
--आईएएनएस
एमएस/
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