Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

पोरबंदर में बनेगा 100 करोड़ रुपए का मरीन बायोटेक कॉरिडोर, गुजरात सरकार की बड़ी योजना


गांधीनगर, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। गुजरात सरकार ने पोरबंदर जिले के मोचा गांव में मरीन बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च एंड इनोवेशन कॉरिडोर (एम-बीआरआईसी) स्थापित करने के लिए अगले पांच वर्षों में 100 करोड़ रुपए निवेश की योजना बनाई है। इस परियोजना के तहत समुद्री अनुसंधान, बायोमैन्युफैक्चरिंग, स्टार्टअप और तटीय आजीविका कार्यक्रमों को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा।

गांधीनगर, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। गुजरात सरकार ने पोरबंदर जिले के मोचा गांव में मरीन बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च एंड इनोवेशन कॉरिडोर (एम-बीआरआईसी) स्थापित करने के लिए अगले पांच वर्षों में 100 करोड़ रुपए निवेश की योजना बनाई है। इस परियोजना के तहत समुद्री अनुसंधान, बायोमैन्युफैक्चरिंग, स्टार्टअप और तटीय आजीविका कार्यक्रमों को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा।

यह प्रस्तावित परियोजना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत संचालित गुजरात स्टेट बायोटेक्नोलॉजी मिशन (जीएसबीटीएम) की पहल है। इसका उद्देश्य गुजरात के समुद्री जैविक संसाधनों को उच्च मूल्य वाले उत्पादों में बदलना और तटवर्ती क्षेत्रों में तकनीक आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना है।

एम-बीआरआईसी की स्थापना के लिए जीएसबीटीएम और सीएसआईआर-सीएसएमसीआरआई (केंद्रीय नमक एवं समुद्री रसायन अनुसंधान संस्थान) के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। यह समझौता विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुन मोढवाडिया तथा कृषि, किसान कल्याण, सहकारिता एवं पशुपालन मंत्री जीतु वघानी की मौजूदगी में होगा।

मोचा गांव को इस परियोजना का प्रमुख केंद्र चुना गया है। यहां 30 एकड़ में अनुसंधान सुविधाएं, औद्योगिक ढांचा, प्रदर्शन क्षेत्र, प्रोसेसिंग इकाइयां और स्टार्टअप इनक्यूबेशन सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

इस परियोजना की गतिविधियां और साझेदारियां सौराष्ट्र क्षेत्र तथा पूरे गुजरात तट तक भी विस्तारित की जा सकती हैं।

प्रस्तावित कॉरिडोर समुद्री जैव प्रौद्योगिकी की पूरी श्रृंखला को कवर करेगा। इसमें समुद्री जैव विविधता की खोज, वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीक विकास, परीक्षण, औद्योगिक विस्तार और व्यावसायीकरण शामिल होगा।

इसमें समुद्री शैवाल (सीवीड), माइक्रोएल्गी, समुद्री सूक्ष्मजीव और खारे पारिस्थितिकी तंत्र जैसे संसाधनों पर काम किया जाएगा।

सरकार इन संसाधनों का उपयोग जैव उर्वरक, बायोस्टिमुलेंट, पोषण उत्पाद, सौंदर्य प्रसाधन उत्पाद, मछली आहार, पशु पोषण उत्पाद, एंजाइम, बायोसर्फैक्टेंट, दवा निर्माण सामग्री और समुद्री जैव सामग्री विकसित करने के लिए करना चाहती है।

समुद्री शैवाल से बनने वाले अगर, एल्जिनेट और कैरेजेनन जैसे उत्पादों को भी मूल्य संवर्धन के लिए शामिल किया जाएगा।

मोचा में एक विशेष सीवीड प्रोसेसिंग क्लस्टर स्थापित करने की योजना है, जहां कच्चे माल की प्राप्ति, धुलाई, प्रारंभिक प्रसंस्करण, निष्कर्षण, सुखाने, पाउडर बनाने, पैकेजिंग, भंडारण और गुणवत्ता परीक्षण जैसी सुविधाएं होंगी।

परियोजना के तहत राज्य स्तर का सीवीड ब्रूड बैंक भी स्थापित किया जाएगा, जो उच्च गुणवत्ता वाले रोपण सामग्री की आपूर्ति करेगा।

इसके अलावा, समुद्री माइक्रोएल्गी आधारित बायोफैक्ट्रियां स्थापित की जाएंगी, जहां ओमेगा-3 फैटी एसिड और अन्य उच्च मूल्य वाले जैव सक्रिय यौगिकों का उत्पादन किया जाएगा। वहीं, एक एकीकृत सीवीड बायोरिफाइनरी में फाइकोकोलॉइड्स, बायोस्टिमुलेंट और अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद बनाए जाएंगे।

परियोजना में समुद्री जैव खोज, जीनोमिक्स, सूक्ष्मजीव विज्ञान, प्राकृतिक उत्पादों और जैव प्रौद्योगिकी विकास के लिए विशेष अनुसंधान सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।

स्टार्टअप और उद्यमियों को प्रयोगशाला से बाजार तक तकनीक पहुंचाने के लिए इनक्यूबेशन सेंटर, पायलट स्तर की बायोप्रोसेसिंग और बायोमैन्युफैक्चरिंग सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।

यह परियोजना प्रोटोटाइप विकास, तकनीक सत्यापन, बौद्धिक संपदा संरक्षण, नियामकीय मूल्यांकन, लाइसेंसिंग, तकनीक हस्तांतरण और उद्योगों के साथ साझेदारी में भी मदद करेगी।

सीएसआईआर-सीएसएमसीआरआई को इस परियोजना का प्रमुख वैज्ञानिक साझेदार बनाया गया है। संस्थान के पास समुद्री शैवाल जैव प्रौद्योगिकी, समुद्री जैव उत्पाद, खारी कृषि, बायोप्रोसेसिंग और तकनीक हस्तांतरण का व्यापक अनुभव है।

इसके तहत भावनगर में सीएसआईआर-सीएसएमसीआरआई से जुड़े नमक उत्पादन क्षेत्रों में माइक्रोएल्गी बायोरिफाइनरी स्थापित करने का भी प्रस्ताव है।

परियोजना में सीवीड मिशन के तहत तटीय युवाओं, समुद्री शैवाल उत्पादकों, मछुआरा समुदायों, महिला उद्यमों, एमएसएमई, उद्यमियों, छात्रों और उद्योग विशेषज्ञों के लिए क्षमता विकास कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे।

इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में समुद्री शैवाल की खेती, जलीय कृषि, मरीन बायोटेक्नोलॉजी, जीनोमिक्स, बायोइन्फॉर्मेटिक्स, समुद्री निदान, प्राकृतिक उत्पाद, बायोप्रोसेसिंग, पर्यावरण निगरानी, उद्यमिता, बौद्धिक संपदा और तकनीक के व्यावसायीकरण जैसे विषय शामिल होंगे।

पर्यावरण निगरानी, जैव विविधता मूल्यांकन और पर्यावरणीय प्रभाव आकलन को भी इस परियोजना का हिस्सा बनाया जाएगा। साथ ही समुद्री आनुवंशिक संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग पर भी जोर दिया जाएगा।

परियोजना में ब्लू कार्बन और जलवायु अनुकूल तटीय विकास पर शोध करने की भी योजना है, जिसमें समुद्री शैवाल और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र की निगरानी शामिल होगी।

यह कॉरिडोर गुजरात के जैव प्रौद्योगिकी ढांचे, बायोई3 नीति, भारत की ब्लू इकोनॉमी प्राथमिकताओं और "विकसित भारत 2047" के विजन के अनुरूप विकसित किया जा रहा है।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी

Date & Time : 2026-10-08 21:35:03

Share:

Leave A Reviews

Related News