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प्रधानमंत्री मोदी ने पेजावर मठ के श्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी की जन्म शताब्दी समारोह के लोगो का अनावरण किया (लीड-1)


नई दिल्ली/बेंगलुरु, 22 सितंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कर्नाटक के उडुपी स्थित श्री पेजावर अधोक्षजा मठ के श्री विश्वप्रसन्ना तीर्थ स्वामीजी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ पद्म विभूषण यतिकुल चक्रवर्ती श्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी की जन्म शताब्दी समारोह के लोगो का अनावरण किया।

नई दिल्ली/बेंगलुरु, 22 सितंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कर्नाटक के उडुपी स्थित श्री पेजावर अधोक्षजा मठ के श्री विश्वप्रसन्ना तीर्थ स्वामीजी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ पद्म विभूषण यतिकुल चक्रवर्ती श्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी की जन्म शताब्दी समारोह के लोगो का अनावरण किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्‍स पर इस मुलाकात का विवरण साझा करते हुए कहा कि श्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी का जीवन और शिक्षाएं अनगिनत लोगों को प्रेरित करती रहेंगी। संत का जीवन भक्ति, ज्ञान और सेवा से परिपूर्ण था। उन्होंने कहा कि उनकी जन्म शताब्दी से पहले शुरू की जा रही विभिन्न पहल उनके महान आदर्शों को आगे बढ़ाने में सहायक होंगी।

उडुपी के पेजावर अधोक्षजा मठ से संबद्ध श्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी अपने आध्यात्मिक उपदेशों और सामाजिक सेवा के लिए व्यापक रूप से जाने जाते थे। जन्म शताब्दी समारोह में उनके योगदान और आदर्शों को उजागर करने वाले विभिन्न कार्यक्रम और पहल शामिल होने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि शताब्दी समारोह के अंतर्गत नियोजित पहल संत के जीवन और कार्यों से जुड़े मूल्यों और सिद्धांतों का अधिक प्रसार करेंगी।

उल्लेखनीय है कि श्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी (1931-2019) एक प्रख्यात हिंदू आध्यात्मिक नेता और उडुपी स्थित पेजावर अधोक्षजा मठ के पूर्व प्रमुख थे, जो उडुपी श्री कृष्ण परंपरा से जुड़े आठ माधव मठों में से एक है।

वे राम जन्मभूमि आंदोलन सहित सार्वजनिक और सामाजिक मुद्दों में सक्रिय रूप से शामिल थे और कर्नाटक और उससे बाहर एक प्रभावशाली आध्यात्मिक व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते थे।

उन्होंने आठ वर्ष की आयु में संन्यास ग्रहण किया और आठ दशकों से अधिक समय आध्यात्मिक और सामाजिक सेवा में व्यतीत किया। वे भगवद् गीता, वेदों और माधव दर्शन पर प्रवचनों और संस्कृत शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए जाने जाते थे।

उन्होंने 1956 में बेंगलुरु में पूर्णप्रज्ञा विद्यापीठ की स्थापना की। वे प्राकृतिक आपदाओं, सूखे और अन्य संकटों से प्रभावित लोगों की सहायता सहित सामाजिक सेवा के कार्यों के लिए भी प्रसिद्ध थे। उन्होंने सामाजिक समावेश को बढ़ावा देने के लिए काम किया और जाति आधारित विभाजनों के विरुद्ध अभियान चलाया, जिसमें दलित समुदायों तक पहुंच बनाना भी शामिल था।

--आईएएनएस

एएसएच/एबीएम

Date & Time : 2026-09-22 22:30:03

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