
यूरोप: डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका को नाटो (NATO) से अलग करने की लगातार धमकियों और वैश्विक अस्थिरता के बीच, यूरोपीय देशों ने अपनी रक्षा के लिए एक ऐतिहासिक और साहसिक कदम उठाया है। यूरोप अब अमेरिका पर अपनी सुरक्षा निर्भरता को खत्म कर एक स्वायत्त सैन्य ढांचा तैयार कर रहा है, जिसे अनौपचारिक रूप से "यूरोपियन NATO" कहा जा रहा है। इस नई रणनीति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें अमेरिका को जानबूझकर शामिल नहीं किया गया है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों इस सप्ताह 40 से अधिक देशों की एक महत्वपूर्ण बैठक की सह-अध्यक्षता करने जा रहे हैं, जिसका उद्देश्य एक स्वतंत्र बहुराष्ट्रीय रक्षा गठबंधन बनाना है।
इस नई सुरक्षा योजना का तत्काल और मुख्य केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) है। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए जीवनरेखा माना जाता है, लेकिन हालिया ईरान युद्ध और ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए नौसैनिक ब्लॉकेड के कारण यहाँ भारी तनाव है। यूरोपीय देशों का मानना है कि ट्रंप की नीतियां अनिश्चित हैं, इसलिए वे अपनी व्यापारिक और ऊर्जा सुरक्षा के लिए अमेरिका के नेतृत्व वाले मिशनों से अलग होकर काम करना चाहते हैं। ब्रिटेन और फ्रांस के नेतृत्व में प्रस्तावित यह मिशन पूरी तरह से 'यूरोपीय कमांड' के तहत संचालित होगा, जो समुद्र से बारूदी सुरंगें हटाने, फंसे हुए जहाजों को निकालने और सुरक्षित शिपिंग रूट बहाल करने पर ध्यान केंद्रित करेगा।
यह कदम सिर्फ सैन्य अभियान नहीं, बल्कि वाशिंगटन के लिए एक कड़ा राजनीतिक संदेश भी है। जर्मनी जैसे देश, जो पारंपरिक रूप से अमेरिका से अलग सैन्य रास्ते पर चलने में हिचकिचाते थे, अब इस आत्मनिर्भर सुरक्षा पहल का समर्थन कर रहे हैं। हालांकि, इस योजना के सामने बड़ी चुनौतियां भी हैं, जैसे ईरान के साथ समन्वय बिठाना और उसी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ब्लॉकेड के साथ टकराव से बचना। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गठबंधन सफल होता है, तो यह दशकों पुराने ट्रांस-अटलांटिक सुरक्षा समीकरण को हमेशा के लिए बदल देगा और यूरोप एक "आत्मनिर्भर सैन्य शक्ति" के रूप में उभरेगा।
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