
वॉशिंगटन/तेहरान. मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है क्योंकि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य की पूर्ण नाकेबंदी लागू कर दी है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि उसने 10,000 से अधिक सैनिकों और 12 से अधिक युद्धपोतों को तैनात किया है ताकि ईरान से होने वाले तेल निर्यात को पूरी तरह ठप किया जा सके.
चीनी जहाजों पर सख्ती: अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया कि चीन अब ईरान से तेल नहीं ले पाएगा. अमेरिकी नौसेना विशेष रूप से ईरानी तेल ले जा रहे चीनी टैंकरों को रोकने के आदेश पर काम कर रही है.
24 घंटे में कोई आवाजाही नहीं: CENTCOM के दावों के अनुसार, नाकेबंदी के पहले 24 घंटों में एक भी जहाज ईरानी बंदरगाहों की ओर नहीं जा सका. छह व्यापारिक जहाजों ने अमेरिकी चेतावनी के बाद अपना रास्ता बदल लिया.
चीन की चेतावनी: बीजिंग ने इस कार्रवाई को 'जंगल राज' करार दिया है. चीनी रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून ने चेतावनी दी है कि वे अपने ऊर्जा समझौतों की रक्षा करेंगे और उनके जहाजों का आवागमन जारी रहेगा. हालांकि, खबरों के अनुसार 'रिच स्टारी' नामक एक चीनी टैंकर ने नाकेबंदी के बाद अपना रास्ता बदल लिया है.
सीजफायर वार्ता: एक तरफ युद्ध जैसे हालात हैं, तो दूसरी तरफ वॉशिंगटन में इजराइल और लेबनान के बीच ऐतिहासिक शांति वार्ता शुरू हुई है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मध्यस्थता में हुई इस पहली बैठक को 'सकारात्मक' बताया जा रहा है.
Leave A Reviews