
शहडोल जिले से स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलने वाली एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। यहाँ समय पर जननी एक्सप्रेस या 108 एंबुलेंस न मिलने के कारण एक गर्भवती महिला को ऑटो से अस्पताल ले जाना पड़ा। रास्ते में ही महिला ने बच्ची को जन्म दिया और अस्पताल पहुंचने के कुछ ही देर बाद इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद एक बार फिर स्थानीय शहडोल स्वास्थ्य व्यवस्था और दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
यह दर्दनाक मामला शहडोल जिले के जैतपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गलहथा गांव का है। यहाँ के मौहर टोला में रहने वाली 22 वर्षीय जयमंती पांडो को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने बिना वक्त गंवाए तुरंत 108 एंबुलेंस को फोन कर सूचना दी।
परिजनों का आरोप है कि फोन करने के बाद वे कई घंटों तक एंबुलेंस का इंतजार करते रहे, लेकिन कोई वाहन मौके पर नहीं पहुंचा। महिला की बिगड़ती हालत को देख परिजनों ने आनन-फानन में गांव के ही एक ऑटो को किराए पर लिया और उसे लेकर जैतपुर अस्पताल के लिए रवाना हुए।
अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में जयमंती की प्रसव पीड़ा बेहद बढ़ गई और उसने ऑटो के अंदर ही एक बच्ची को जन्म दे दिया। इसके बाद परिजन जैसे-तैसे प्रसूता और नवजात शिशु को लेकर जैतपुर अस्पताल पहुंचे।
अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों ने तुरंत मां और नवजात बच्ची का इलाज शुरू किया। हालांकि, समय पर सही इलाज न मिलने और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण महिला की हालत बिगड़ती चली गई और उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। इस घटना ने साबित कर दिया है कि ग्रामीण इलाकों में आज भी शहडोल स्वास्थ्य व्यवस्था दम तोड़ रही है।
इस पूरे संवेदनशील मामले को लेकर बुढ़ार के बीएमओ (BMO) डॉ. सचिन कारखुर ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने बताया कि गर्भवती महिला की स्थानीय उप स्वास्थ्य केंद्र की एएनएम (ANM) के जरिए नियमित मॉनिटरिंग की जा रही थी।
बीएमओ के मुताबिक, "गर्भवती महिला बीच में कुछ दिनों के लिए अपने मायके चली गई थी, जिसकी वजह से उसकी कुछ जरूरी जांचें समय पर नहीं हो सकी थीं। हालांकि, अब तक उसकी तीन प्रसव पूर्व जांचें की जा चुकी थीं।" उन्होंने यह बात स्वीकार की कि एंबुलेंस के देरी से पहुंचने के कारण ही महिला को रास्ते में प्रसव की स्थिति से गुजरना पड़ा।
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