
जयपुर। राजस्थान के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने जल जीवन मिशन (जेजेएम) में हुए 900 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व कैबिनेट मंत्री महेश जोशी को गिरफ्तार कर लिया है। पिछली कांग्रेस सरकार में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री रहे जोशी की यह गिरफ्तारी सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद हुई है। गिरफ्तारी के बाद जोशी को कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें 11 मई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।
एसीबी की विशेष जांच दल (एसआईटी) ने गुरुवार तड़के करीब पांच बजे महेश जोशी के जयपुर स्थित आवास पर छापा मारा और उन्हें हिरासत में ले लिया। एसीबी के अनुसार, जोशी पर मंत्री पद का दुरुपयोग करने और ठेके देने के बदले रिश्वत लेने का गंभीर आरोप है। गौरतलब है कि इससे पहले अप्रैल 2025 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी इसी मामले से जुड़े धनशोधन के केस में उन्हें गिरफ्तार कर चुका था। करीब सात महीने जेल में रहने के बाद पिछले दिसंबर में ही उन्हें उच्चतम न्यायालय से जमानत मिली थी।
अदालत ले जाते समय पूर्व मंत्री महेश जोशी ने पत्रकारों से बातचीत में खुद को निर्दोष बताया और इस कार्रवाई को "क्रूर" करार दिया। जोशी ने भावुक होते हुए कहा कि आज उनकी शादी की सालगिरह है और बिना किसी पूर्व नोटिस के सुबह-सुबह की गई यह कार्रवाई उनकी पत्नी को मानसिक दुख पहुँचाने वाली है। उन्होंने कहा कि "सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं।" हालांकि, उन्होंने घोटाले के तकनीकी पहलुओं पर कोई विस्तृत टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
एसीबी की जांच में सामने आया है कि इस घोटाले में कई अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत थी। आरोप है कि कुछ कंपनियों ने जाली अनुभव प्रमाण पत्र जमा करके करोड़ों के ठेके हासिल किए थे। एसीबी ने साल 2024 के अंत में इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी और अब तक पूर्व मंत्री सहित कुल 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। फिलहाल, पुलिस हिरासत में जोशी से पूछताछ की जा रही है ताकि इस बड़े भ्रष्टाचार नेटवर्क की अन्य कड़ियों का खुलासा किया जा सके।
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