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राम जन्मभूमि दान प्रकरण विवाद में एफआईआर दर्ज होना स्वागत योग्य कदम: देवेशाचार महाराज


अयोध्या, 25 जून (आईएएनएस)। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र दान प्रकरण में बड़ा कदम उठाते हुए 8 नामजद और अन्य अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। यह कार्रवाई तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर की गई है। एसआईटी ने अपनी जांच में कई गंभीर अनियमितताओं की ओर संकेत करते हुए कठोर संस्तुतियां की थीं, जिसके बाद मामला दर्ज किया गया। मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद देवेशाचार महाराज ने इस कार्रवाई का स्वागत किया।

अयोध्या, 25 जून (आईएएनएस)। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र दान प्रकरण में बड़ा कदम उठाते हुए 8 नामजद और अन्य अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। यह कार्रवाई तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर की गई है। एसआईटी ने अपनी जांच में कई गंभीर अनियमितताओं की ओर संकेत करते हुए कठोर संस्तुतियां की थीं, जिसके बाद मामला दर्ज किया गया। मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद देवेशाचार महाराज ने इस कार्रवाई का स्वागत किया।

देवेशाचार महाराज ने कहा कि यह कदम पहले ही उठा लिया जाना चाहिए था। मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली है कि आधा दर्जन से अधिक लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

समाचार एजेंसी आईएएनएस से खास बातचीत में देवेशाचार महाराज ने कहा कि यह कार्रवाई बहुत पहले हो जानी चाहिए थी। जिन लोगों पर आरोप लगे थे, उन्हें तत्काल हिरासत में लेकर गहन जांच-पड़ताल की जानी चाहिए थी। हालांकि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुरुआत से ही प्रदेशवासियों और सनातन समाज को आश्वस्त किया था कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी और दूध का दूध तथा पानी का पानी किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि एसआईटी ने जांच पूरी करने के बाद अपनी रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को सौंपी और मुख्यमंत्री के संज्ञान में मामला आने के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई है। इस मामले में एफआईआर दर्ज होना यह दिखाता है कि सरकार मामले को गंभीरता से ले रही है और किसी भी स्तर पर अनियमितता को बर्दाश्त नहीं करना चाहती।

देवेशाचार महाराज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ ऐसी कठोर कार्रवाई की जाए जो भविष्य के लिए उदाहरण बन सके। उन्होंने कहा कि रामभक्तों, सनातन समाज और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में विश्वासघात करने वालों को ऐसा दंड मिलना चाहिए कि भविष्य में कोई भी व्यक्ति धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ करने का साहस न कर सके।

इस पूरे प्रकरण को सनातन समाज के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि यह घटना विशेष रूप से इसलिए भी दुखद है क्योंकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री स्वयं एक संत हैं और उनके कार्यकाल में इस प्रकार के आरोप सामने आना चिंताजनक है। महाराज ने विश्वास जताया कि जांच निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ेगी और जो भी व्यक्ति दोषी होगा, उसे कड़ी सजा मिलेगी।

--आईएएनएस

पीएसके

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