नई दिल्ली, 7 अगस्त (आईएएनएस)। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर शुक्रवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देशवासियों से हथकरघा उत्पादों को अपनाने और बुनकर परिवारों का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि हथकरघा केवल एक पारंपरिक वस्त्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, विरासत और आत्मनिर्भरता का जीवंत प्रतीक है। इस अवसर पर वित्त मंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वित्त मंत्री का एक वीडियो संदेश भी शेयर किया।
![]()
नई दिल्ली, 7 अगस्त (आईएएनएस)। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर शुक्रवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देशवासियों से हथकरघा उत्पादों को अपनाने और बुनकर परिवारों का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि हथकरघा केवल एक पारंपरिक वस्त्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, विरासत और आत्मनिर्भरता का जीवंत प्रतीक है। इस अवसर पर वित्त मंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वित्त मंत्री का एक वीडियो संदेश भी शेयर किया।
वित्त मंत्री कार्यालय की ओर से शेयर किए गए संदेश में कहा गया, "आज राष्ट्रीय हथकरघा दिवस है, जो हमें वर्ष 1905 के स्वदेशी आंदोलन की याद दिलाता है। वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दिन को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में समर्पित किया था, ताकि देश की समृद्ध हथकरघा परंपरा को सम्मान और नई पहचान मिल सके।"
संदेश में आगे कहा गया कि हथकरघा भारतीय संस्कृति की एक महत्वपूर्ण पहचान है और देश का प्रत्येक राज्य अपनी समृद्ध हथकरघा परंपरा के लिए जाना जाता है।
पोस्ट में आगे वित्त मंत्री ने कहा कि उन्होंने इस अवसर पर असम की पारंपरिक मेखला-चादर पहनी है, जिसे उन्होंने सबसे आरामदायक पारंपरिक परिधानों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि चाहे वह रेशम हो या सूती वस्त्र, प्रत्येक हथकरघा उत्पाद उन बुनकर परिवारों की मेहनत, कला और समर्पण की कहानी कहता है, जो इन्हें तैयार करते हैं।
उन्होंने सभी नागरिकों से आग्रह करते हुए कहा कि अधिक से अधिक लोग हथकरघा उत्पादों का उपयोग करें और उन परिवारों का समर्थन करें, जिनकी आजीविका इस पारंपरिक कला पर निर्भर है।
वित्त मंत्री कार्यालय द्वारा साझा किए गए वीडियो में निर्मला सीतारमण ने कहा कि हथकरघा भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान में से एक है। भारत का हर राज्य अपनी विशिष्ट हथकरघा परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। चाहे असम, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात या मध्य प्रदेश हो, प्रत्येक राज्य की अपनी अलग बुनाई शैली और पारंपरिक वस्त्र हैं, जो देश की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते हैं।
आगे वित्त मंत्री ने देशवासियों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि हथकरघा अपनाना केवल पारंपरिक वस्त्र पहनना नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को संजोने और लाखों बुनकर परिवारों के जीवन को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
--आईएएनएस
डीबीपी
Leave A Reviews