
रीवा। जिले में भ्रष्टाचार और सरकारी कार्यों में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। बुधवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए कलेक्टर ने सेमरिया तहसील में पदस्थ सहायक वर्ग-3 (बाबू) प्रशांत तिवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। प्रशांत तिवारी पर आरोप है कि उन्होंने वारसाना नामांतरण जैसे महत्वपूर्ण राजस्व प्रकरण को रिश्वत की लालच में लंबे समय तक अटका कर रखा था। कलेक्टर ने इस मामले में बिना किसी लंबी जांच के, प्राथमिक दस्तावेजों के आधार पर ही निलंबन के आदेश जारी कर दिए, जिससे राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया है।
रिश्वत के लिए अटकाया नामांतरण प्रकरण मामले के अनुसार, सेमरिया तहसील में आवेदक मान सिंह, केबिल सिंह, उमेश सिंह और बबली सिंह ने अपने वारसाना नामांतरण के लिए आवेदन किया था। बाबू प्रशांत तिवारी ने इन आवेदकों के काम को गति देने के बजाय पैसों की मांग की और प्रकरण को पेंडिंग रखा। पीड़ितों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने त्वरित निर्णय लिया। इस सख्त कार्रवाई के बाद आरोपी कर्मचारी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक सफाई पेश नहीं की गई है। कलेक्टर ने स्पष्ट संदेश दिया है कि आमजन के कार्यों में अवैध वसूली या देरी कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
PM आवास सर्वे में घूसखोरी: CEO को कारण बताओ नोटिस कलेक्टर ने भ्रष्टाचार के एक अन्य मामले में जनपद पंचायत गंगेव की सीईओ को भी आड़े हाथों लिया है। सिरमौर तहसील के ग्राम बड़ोखर निवासी रामलखन नामदेव ने शिकायत की थी कि प्रधानमंत्री आवास योजना के सर्वे के दौरान ग्राम रोजगार सहायक ने उनसे 20 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। पीड़ित का आरोप है कि रिश्वत न देने के कारण उन्हें योजना के लाभ से वंचित कर दिया गया। इस गंभीर शिकायत पर संज्ञान लेते हुए कलेक्टर ने गंगेव सीईओ को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब मांगा है। निर्धारित समय में स्पष्टीकरण न मिलने पर संबंधित के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
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