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रीवा: जैन साध्वियों को कुचलने के मामले में सीन रीक्रिएट, DGP को नोटिस के बाद पुलिस सख्त


रीवा: मध्य प्रदेश के रीवा जिले में जैन साध्वियों को कार से कुचलने के हाई-प्रोफाइल मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के दखल के बाद हड़कंप मच गया है। आयोग द्वारा प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी किए जाने के बाद मंगलवार शाम रीवा पुलिस अचानक बेहद सक्रिय नजर आई। पुलिस के आला अधिकारियों ने फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की विशेष टीम के साथ कलेक्ट्रेट के सामने स्थित घटनास्थल का दोबारा बारीकी से मुआयना किया। इस दौरान सुरक्षा के लिहाज से पूरे क्षेत्र की बैरिकेडिंग की गई और विशेषज्ञों की मौजूदगी में 'क्राइम सीन रीक्रिएट' कराया गया, ताकि घटना के हर तकनीकी पहलू की सटीक जांच की जा सके।

CCTV फुटेज सामने आने के बाद बदली पुलिस की थ्योरी

शुरुआती चरण में रीवा पुलिस इस पूरे घटनाक्रम को एक सामान्य और लापरवाही से हुई सड़क दुर्घटना मानकर चल रही थी। लेकिन शनिवार रात सोशल मीडिया पर सामने आए एक दिल दहला देने वाले सीसीटीवी (CCTV) फुटेज ने पुलिस की जांच की दिशा और दशा दोनों बदल दी। इस फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि आरोपी की कार पहले सड़क पर बिल्कुल सामान्य रूप से सीधी चल रही थी, लेकिन जैन साध्वियों को देखते ही चालक ने अचानक गाड़ी मोड़ी और उन्हें बेरहमी से कुचलते हुए रफ्तार में आगे निकल गया। इस वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद से ही पूरे जैन समाज और स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

चित्रात्मक प्रस्तुति: रीवा में घटनास्थल की घेराबंदी कर जांच में जुटी फॉरेंसिक और पुलिस टीम।

डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल और जैन समाज ने उठाए सवाल

इस बेहद संवेदनशील मामले पर मध्य प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) राजेंद्र शुक्ल ने भी कड़ा रुख अपनाया है। जैन धर्मशाला पहुंचे डिप्टी सीएम ने सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद स्पष्ट तौर पर कहा था कि यह कोई सामान्य हादसा नहीं लग रहा, बल्कि फुटेज से साफ है कि साध्वियों को जानबूझकर कार से कुचला गया है। उन्होंने मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। दूसरी ओर, जैन समाज लगातार इस मामले को साधारण एक्सीडेंट की धारा से हटाकर सीधे 'हत्या के प्रयास' या 'हत्या' का प्रकरण दर्ज करने की मांग पर अड़ा हुआ है।

FSL टीम की तकनीकी जांच और चश्मदीदों से दोबारा पूछताछ

मंगलवार को हुई इस विशेष तफ्तीश के दौरान एफएसएल और पुलिस की संयुक्त टीम ने सड़क पर टायरों के निशान, कार की संभावित गति, और टक्कर के एंगल की मैपिंग की। यह समझने का प्रयास किया गया कि क्या कार में कोई तकनीकी खराबी आई थी या फिर यह सोची-समझी साजिश थी। इसके साथ ही, पुलिस अधिकारियों ने घटना के वक्त मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और कुछ प्रमुख चश्मदीदों को घटनास्थल पर बुलाकर उनसे दोबारा पूछताछ की और उनके बयानों को दर्ज किया।

रीवा की एडिशनल एसपी आरती सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि मानवाधिकार आयोग के नोटिस और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हर एंगल से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। एफएसएल की फाइनल तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में एफआईआर में नई और कड़ी धाराएं जोड़ी जाएंगी। फिलहाल पूरे शहर में सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है।

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