
इंदौर। मध्य प्रदेश शासन द्वारा प्रशासनिक फेरबदल के तहत इंदौर नगर निगम के तत्कालीन अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया को रायसेन जिले का नया कलेक्टर नियुक्त किए जाने पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। बहुचर्चित भागीरथपुरा दूषित पेयजल त्रासदी के बाद न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रहे लोगों के बीच इस पदस्थापना को लेकर तीव्र प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इंदौर शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुरजीत सिंह 'चिंटू' चौकसे ने राज्य सरकार के इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे प्रभावित परिवारों और आम जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करार दिया है।
कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट द्वारा गठित जांच आयोग की रिपोर्ट में सिसोनिया की प्रशासनिक लापरवाही का उल्लेख होने के बावजूद सरकार ने उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के बजाय जिले की कमान सौंप दी। उन्होंने कहा कि भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी की समस्या के समाधान और पुरानी पाइपलाइनों को बदले जाने से संबंधित महत्वपूर्ण फाइलों को अटकाने के लिए सीधे तौर पर सिसोनिया जिम्मेदार थे। हादसे के समय सरकार ने संबंधित अधिकारी को निलंबित करने की बात कही थी, लेकिन आदेश जारी करने के बजाय उन्हें केवल इंदौर से हटाया गया और अब पदोन्नति स्वरूप कलेक्टर बना दिया गया।
कांग्रेस ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य प्रशासन को जनता की सुरक्षा और न्याय की तुलना में लापरवाह अफसरों के हितों की अधिक चिंता है। हादसे में अपनों को खोने वाले पीड़ित परिवार जांच आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का इंतजार कर रहे थे। चौकसे ने मांग की कि प्रशासनिक संरक्षण देने के स्थान पर जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जानी चाहिए, जिससे भविष्य में ऐसी त्रासदियों की पुनरावृत्ति न हो।
इसके साथ ही कांग्रेस ने इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) के पूर्व मुख्य कार्यपालन अधिकारी परीक्षित झाड़े को भी कलेक्टर बनाए जाने पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। चिंटू चौकसे ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के दौरान सरकार के दबाव में आईडीए ग्राउंड के लिए करीब 14 लाख रुपये का अत्यधिक किराया वसूला गया और आयोजन में प्रशासनिक बाधाएं उत्पन्न की गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों के कार्यक्रमों में रुकावट डालने वाले अधिकारियों को पुरस्कृत करने की नीति के तहत ही ऐसी नियुक्तियां की जा रही हैं।
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