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सामान्य वायरल बुखार में बिना निदान के अनावश्यक एंटीबायोटिक्स देना टालें : डॉ हर्ष तोषनीवाल


गांधीनगर, 20 अगस्त (आईएएनएस)। गांधीनगर के महात्मा मंदिर में आयोजित ‘सीड्सकॉन-2026: 16वीं एनुअल कॉन्फ्रेंस ऑन क्लिनिकल इंफेक्शियस डिजीजिस सोसाइटी कॉन्फ्रेंस’ के पूर्वार्ध के रूप में गुरुवार को पोस्ट ग्रेजुएट रेजिडेंट डॉक्टरों एवं युवा चिकित्सकों के लिए विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर वर्कशॉप्स का आयोजन किया गया।

गांधीनगर, 20 अगस्त (आईएएनएस)। गांधीनगर के महात्मा मंदिर में आयोजित ‘सीड्सकॉन-2026: 16वीं एनुअल कॉन्फ्रेंस ऑन क्लिनिकल इंफेक्शियस डिजीजिस सोसाइटी कॉन्फ्रेंस’ के पूर्वार्ध के रूप में गुरुवार को पोस्ट ग्रेजुएट रेजिडेंट डॉक्टरों एवं युवा चिकित्सकों के लिए विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर वर्कशॉप्स का आयोजन किया गया।

इन वर्कशॉप्स में संक्रामक रोगों के सटीक निदान, उपचार की आधुनिक पद्धतियों और एंटीबायोटिक दवाओं के उचित उपयोग के संबंध में युवा चिकित्सकों को अनुभवी और प्रतिष्ठित विषय-विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया गया।

सीड्सकॉन के सह-आयोजन अध्यक्ष तथा श्री स्वामिनारायण इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस एंड रिसर्च-कलोल के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. हर्ष तोषनीवाल ने कहा कि यह कॉन्फ्रेंस वर्तमान समय में बहुत प्रासंगिक है, क्योंकि यह बुखार और विभिन्न प्रकार के संक्रमणों पर केंद्रित है। वर्कशॉप्स के माध्यम से युवा डॉक्टरों को एंटीबायोटिक दवाओं के अनावश्यक उपयोग को रोकने, इसके कार्यक्षमता उपयोग को प्रोत्साहित करने तथा उचित निदान को प्राथमिकता देने के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

उन्होंने आगे कहा कि वायरल बुखार या मौसमी बुखार जैसे मामलों में एंटीबायोटिक्स देना टालना चाहिए, ताकि भविष्य की पीढ़ी के लिए इन दवाओं की प्रभावशीलता बनाए रखी जा सके। चिकित्सकों को मरीज की पूरी हिस्ट्री लेनी चाहिए, शारीरिक जांच करनी चाहिए और लैबोरेटरी रिपोर्ट्स का उचित उपयोग करके सटीक निदान करना चाहिए। इन वर्कशॉप्स के आयोजन से सीड्सकॉन की मुख्य कॉन्फ्रेंस के लिए उचित वातावरण तैयार हुआ है।

वर्कशॉप में युवा डॉक्टरों को मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए फैकल्टी के रूप में विशेषज्ञ डॉ. एम. आर. शिवप्रकाश उपस्थित रहे। माइकोलॉजी के क्षेत्र में कार्यरत डॉ. एम. आर. शिवप्रकाश ने देश में तेजी से बढ़ रहे फंगल इन्फेक्शन और एंटीफंगल दवाओं के खिलाफ बढ़ते रेजिस्टेंस को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि एंटीबैक्टीरियल रेजिस्टेंस के बारे में लोग जागरूक हैं, लेकिन फंगल इन्फेक्शन और उसके उपचार की जटिलताओं को समझना अत्यंत आवश्यक है। मस्तिष्क के इन्फेक्शन जैसी गंभीर स्थितियों में कौन-सी एंटीफंगल दवाएँ प्रभावी रहेंगी, इसकी बुनियादी समझ होना बहुत जरूरी है।

उन्होंने दाद (डर्माटोफाइटोसिस/रिंगवर्म) का उदाहरण देते हुए कहा कि एक दशक पहले यह इन्फेक्शन सामान्य मरहम से ठीक हो जाता था, लेकिन अब यह अत्यंत जिद्दी हो गया है और लंबे उपचार के बाद भी मरीज के पूरे शरीर में तथा सर के हिस्से तक फैल जाता है। अब यह जानवरों से मनुष्यों में और मनुष्यों से मनुष्यों में खुजली की तरह तेजी से फैलता है। यह इन्फेक्शन अब केवल ग्रामीण या गरीब वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि शहरों में और उच्च स्वच्छता रखने वाले लोगों में भी देखने को मिलता है।

उन्होंने युवा डॉक्टरों से उचित पद्धति द्वारा सटीक निदान करने और फंगल दवाओं के विषैले प्रभाव तथा फार्माकोकाइनेटिक्स को समझने का अनुरोध किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि एंटीफंगल स्टेवर्डशिप प्रोग्राम को एंटीबैक्टीरियल स्टेवर्डशिप से पूरी तरह अलग रखा जाना चाहिए; ताकि फंगल रेजिस्टेंस को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके।

युवा डॉक्टरों को मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए मुंबई से आईं प्रतिष्ठित माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. अंजली शेट्टी ने कहा कि इस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इंफेक्शन कंट्रोल, माइक्रोबायोलॉजी और संक्रामक रोगों के संबंध में जागरूकता का संदेश पूरे देश में फैलेगा। आज के सत्र अत्यंत जानकारीपूर्ण रहे और बड़ी संख्या में चिकित्सकों ने इसमें उपस्थिति दर्ज कराई।

वर्कशॉप में सहभागी हुए डॉ. चिंतन जादव ने कहा कि इस प्रकार की वर्कशॉप्स युवा पोस्ट ग्रेजुएट डॉक्टरों को क्लिनिकल प्रैक्टिस में रोजमर्रा की चुनौतियों का सामना करने और मरीजों के अधिक गुणवत्तापूर्ण उपचार के लिए अत्यंत उपयोगी मार्गदर्शन प्रदान करती हैं।

आईडी 360 : मास्टरिंग द बेसिक्स : संक्रामक रोगों के मूलभूत सिद्धांतों, विस्तृत केस हिस्ट्री लेखन और बुनियादी जाँच की पद्धतियों पर मार्गदर्शन।

माइक्रोबायोलॉजी 360 : डायग्नोस्टिक्स, स्टेवर्डशिप एंड इंफेक्शन कंट्रोल : प्रयोगशाला निदान, दवाओं के सीमित और सटीक उपयोग तथा अस्पताल में इन्फेक्शन कंट्रोल की पद्धतियाँ।

द जीरो डिफेंस चैलेंज : आईडी इन द इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड : डायबिटीज, किडनी फेल्योर या ऑर्गन ट्रांसप्लांट वाले कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता रखने वाले मरीजों के जटिल उपचार के संबंध में विशेष मार्गदर्शन।

एआई एंड टेक्नोलॉजी इन आईडी प्रैक्टिस : संक्रामक रोगों के निदान और उपचार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक टेक्नोलॉजी का उपयोग।

आईडी इश्यूज इन सर्जिकल प्रैक्टिस : सर्जरी के दौरान और उसके बाद मरीजों को इन्फेक्शन से बचाने के लिए तथा एंटीबायोटिक्स के उचित उपयोग के संबंध में मार्गदर्शन।

--आईएएनएस

डीकेपी/

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