लखनऊ, 4 सितंबर (आईएएनएस)। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को फिलहाल पार्टी की किसी बड़ी जिम्मेदारी से दूर रखने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। इसी बीच यूपी सरकार में मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने आकाश आनंद को अपनी पार्टी में शामिल होने का खुला प्रस्ताव दिया है।
![]()
लखनऊ, 4 सितंबर (आईएएनएस)। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को फिलहाल पार्टी की किसी बड़ी जिम्मेदारी से दूर रखने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। इसी बीच यूपी सरकार में मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने आकाश आनंद को अपनी पार्टी में शामिल होने का खुला प्रस्ताव दिया है।
मंत्री संजय निषाद ने कहा है कि आकाश आनंद अगर निषाद पार्टी में आते हैं तो उन्हें उनकी पसंद का पद और पूरा सम्मान दिया जाएगा। उन्होंने आकाश आनंद से सोच-समझकर फैसला लेने की बात कही।
लखनऊ में आईएएनएस से बात करते हुए संजय निषाद ने कहा, "मैं आकाश आनंद से गुजारिश करना चाहता हूं कि वे सोच-समझकर फैसला लें। एक कहावत है, जिधर जवानी चलती है, उधर जमाना चलता है। निषाद समुदाय की कोशिशों के पीछे यही सोच है।"
संजय निषाद ने बहुजन आंदोलन और सामाजिक न्याय की बात करते हुए कहा कि देश की 90 प्रतिशत आबादी उन समुदायों से आती है जिन्होंने ऐतिहासिक रूप से अभाव का सामना किया है। उन्होंने कहा, "हजारों सालों से यह सोच रही है कि गरीब कमाएगा और अमीर उसका उपभोग करेगा, लेकिन संवैधानिक व्यवस्था में ऐसा नहीं है। सब लोग मिलकर कमाएंगे और सरकार के पैसे से गरीब, निचले पायदान के लोगों को विकास की धारा में लाया जाएगा, पढ़ाया-लिखाया जाएगा।"
उन्होंने कांशीराम और डॉ. भीमराव अंबेडकर की विचारधारा का भी जिक्र किया। निषाद ने कहा, "नारा था- अंबेडकर के सपने अधूरे, कांशीराम करेंगे पूरे और विचारधारा थी अंबेडकर जी की और अब कांशीराम के सपने अधूरे, हम लोग मिलकर करेंगे पूरे। निषाद पार्टी इसी विचार पर निर्भर है।"
आकाश आनंद को लेकर उन्होंने कहा, "हम लोगों ने कांशीराम के साथ बहुत लंबे समय तक काम किया है। दो तरह की सोच थी, एक सोच पांच हजार बरस से थी कि भगवान ने लोगों को गरीब बना दिया, झोपड़ी वाले कमाएंगे, खोपड़ी वाले खाएंगे, गरीब कमाएंगे, अमीर लोग खाएंगे। लेकिन संवैधानिक व्यवस्था में ऐसा कुछ नहीं है।"
उन्होंने युवाओं की भागीदारी पर जोर देते हुए कहा, "निश्चित रूप से जिधर जवानी चलती है, उधर जमाना चलता है। युवा आएगा तभी उसका भविष्य बनेगा। युवाओं को आगे लाना ही हमारी प्राथमिकता है, क्योंकि यह लंबे समय तक की लड़ाई है। एक दिन की नहीं, पांच हजार वर्ष की यह बीमारी एक दिन में खत्म नहीं होगी। उसके लिए युवाओं को ही प्रशिक्षित करना, युवाओं को अवसर देना ही हमारी प्राथमिकता है और युवाओं से ही बदलाव आएगा।"
--आईएएनएस
पीआईएम/वीसी
Leave A Reviews