नई दिल्ली, 19 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने संसद में विपक्ष के हंगामा करने, चीन सीमा विवाद, सेना पर बयानबाजी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयानों सहित कई अहम मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। रिजिजू ने कहा कि सीमा से जुड़े वास्तविक मुद्दों को गंभीरता से लेने की जरूरत है, लेकिन भ्रामक दावे कर देश में भ्रम फैलाना उचित नहीं है।
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नई दिल्ली, 19 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने संसद में विपक्ष के हंगामा करने, चीन सीमा विवाद, सेना पर बयानबाजी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयानों सहित कई अहम मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। रिजिजू ने कहा कि सीमा से जुड़े वास्तविक मुद्दों को गंभीरता से लेने की जरूरत है, लेकिन भ्रामक दावे कर देश में भ्रम फैलाना उचित नहीं है।
उन्होंने सेना को राजनीति से दूर रखने की अपील करते हुए विपक्ष की कार्यशैली और संसद में हंगामे पर भी सवाल उठाए। साथ ही, परिसीमन, छात्रों की चिंताओं, 'वंदे मातरम' और विशेषाधिकार नोटिस जैसे मुद्दों पर भी सरकार का पक्ष रखा। यहां पढ़ें आईएएनएस से केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू की विशेष बातचीत के मुख्य अंश।
सवाल : राहुल गांधी को ‘दिमागी नक्सल’ शब्द से आखिर क्यों आपत्ति हो रही है और उन्हें यह बात क्यों चुभ गई?
जवाब : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिन लोगों के लिए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया है, वे लोग संविधान के खिलाफ काम करते हैं। हथियार उठाने वाले नक्सलवाद को लगभग समाप्त कर दिया गया है। हमारे आर्मी, बीएसएफ, आईटीबीपी और सीआरपीएफ के जवान नक्सलवाद और माओवादी हिंसा का शिकार होते हैं। माओवादी और नक्सली विचारधारा से जुड़े कुछ लोग हमारे जवानों की मौत पर जश्न मनाते हैं। यह बात किसी से छिपी नहीं है। यह तो सभी को मालूम है, किसी को इसमें कन्फ्यूजन नहीं होना चाहिए।
सवाल : राहुल गांधी के चीन वाले बयान पर क्या कहेंगे? उन्होंने दावा किया कि चीन भारत में 60 किलोमीटर अंदर तक घुस गया।
जवाब : यह कहना बिल्कुल गलत है कि चीन भारत की सीमा में 60 किलोमीटर अंदर घुस आया है। इस तरह की बातें नहीं कही जानी चाहिए। अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर सीमा से जुड़ी समस्याएं हैं और इन समस्याओं की जड़ को समझना जरूरी है। भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश में बहुत लंबी सीमा है, जिसका कई इलाकों में स्पष्ट रूप से सीमांकन नहीं हुआ है। कई स्थानों पर न तो सीमा स्तंभ हैं और न ही जमीन पर सीमा को स्पष्ट रूप से चिन्हित किया गया है। यह कोई नया मुद्दा नहीं है। मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि जो लोग कहते हैं कि 60 किलोमीटर चीन अंदर घुस आया है और तरह-तरह का वीडियो शेयर करके भ्रम फैलाते हैं, ये गलत बात है। बॉर्डर में प्रॉब्लम है। हमारे अरुणाचल के गांव के कुछ लोग बॉर्डर प्रॉब्लम को लेकर जो चिंता जाहिर किए हैं, वो सही है क्योंकि वहां बॉर्डर डिलिमिटेशन नहीं हुआ। मुख्य समस्या यह रही कि चीन ने अपनी तरफ पहले सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण शुरू कर दिया। उस समय भारत में कांग्रेस की सरकार थी। तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी ने संसद में कहा था कि भारत सरकार की नीति सीमा के कुछ क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा विकसित न करने की थी, जबकि चीन अपनी तरफ लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करता रहा। अब भारत की ओर से भी वर्ष 2014 के बाद सीमा क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण का काम तेज किया गया है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में नीति बदली गई और अब हमारी तरफ भी सड़कें और अन्य सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। जो अंतिम सीमा बिंदु के पास स्थित एक गांव है, वहां मैं स्वयं गया हूं। मैंने वहां सीमा सुरक्षा बलों और सेना के जवानों से मुलाकात की है। वहां सड़क निर्माण का काम भी पूरा कराया गया है। आजादी के बाद कई दशकों तक सीमा तक पहुंचने के लिए पर्याप्त सड़क नहीं थी। मोदी सरकार के दौरान वहां सड़क निर्माण को गति मिली। ताकसिंग तक सड़क संपर्क को भी मजबूत किया गया। वर्ष 2019 में वहां सड़क निर्माण का काम पूरा हुआ। जब हमारी ओर पर्याप्त सड़कें नहीं थीं और चीन ने अपनी तरफ बुनियादी ढांचा विकसित कर लिया था, तब ऊपरी इलाकों में कुछ स्थानों पर चीनी सेना ने अपनी मौजूदगी बढ़ाई और सीमा से जुड़े ढांचे बनाए। अब भारत भी अपनी तरफ बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहा है। ऐसा नहीं है कि चीन ने हमारे गांवों पर कब्जा कर लिया है। हमारी आईटीबीपी की पेट्रोलिंग पहले की तुलना में मजबूत हुई है। लोंगजू से आगे एक घाटी वाले क्षेत्र में चीनी पीएलए के कुछ ढांचे बने हुए हैं और गांव जैसी दिखाई देने वाली कुछ इमारतें भी बनाई गई हैं। उस क्षेत्र को लेकर पुराना विवाद रहा है। हमारे अनुसार, उस जमीन पर चीन ने वर्ष 1959 में कब्जा किया था और 1962 में वहां अपनी स्थिति मजबूत की। अभी सीमा बिंदु पर हमारी भी पोस्ट मौजूद है। उस क्षेत्र में भारत और चीन के बीच सामान्य आवाजाही बंद है।
सवाल : राहुल गांधी तस्वीरें भी लाए थे, यह दिखाने के लिए कि चीन ने कितनी अंदर तक घुसपैठ की है। इस पर आप क्या कहेंगे?
जवाब : सेना देश की रक्षा करती है और उसे राजनीतिक विवादों में नहीं घसीटना चाहिए। सेना के जनरल के लिए ‘सड़क छाप’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना बेहद आपत्तिजनक है। ऐसी भाषा पर कांग्रेस नेताओं को गंभीरता से विचार करना चाहिए। कांग्रेस के लोगों को सोचना चाहिए।
सवाल : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर मानसून सत्र में विपक्ष ने हंगामा किया। आरोप लगाया कि वे संसद में नहीं आए, आप क्या कहेंगे?
जवाब : केंद्रीय गृह मंत्री संसद आते थे और सुबह से रात तक संसद में रहते थे। अब हंगामे के बीच में नहीं जा सकते हैं, न। वह संसद में ही रहते थे, विपक्ष ने सिर्फ अफवाह फैलाने का काम किया है।
सवाल : क्या आम आदमी पार्टी ने अभिजीत दिपके का अपनी राजनीति के लिए इस्तेमाल किया?
जवाब : इसका जवाब तो सभी को मालूम है कि आम आदमी पार्टी चुनाव हारी तो, छात्रों को आगे बढ़ाने का काम किया। अभिजीत दिपके आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता हैं और यह तो सबको मालूम है। केंद्र सरकार छात्रों की चिंताओं को सुनेगी और सुनती भी है। पीएम मोदी ने इस दिशा में काम भी किया है। लेकिन, किसी भी पार्टी को इसका राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
सवाल : परिसीमन बिल पर आपकी क्या राय है? क्या इसके लिए कोई विशेष सत्र बुलाया जा सकता है?
जवाब : सरकार चाहती है और हमने कांग्रेस से बात की है और उनका समर्थन मांगा है। अगर कांग्रेस की सोच में कोई सकारात्मक बात आती है और कुछ बदलाव आता है, तो शायद वो समर्थन करेंगे।
सवाल : क्या लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भारत में नेपाल या बांग्लादेश जैसे हालात पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं?
जवाब : कोई भी नेता हो, चाहे वो कांग्रेस के नेता हों या कोई भी हों, अगर संविधान के खिलाफ और देश में अराजकता पैदा करता है, तो उसका समर्थन नहीं करना चाहिए। राहुल गांधी से हमारी मुलाकात भी हुई और फोन पर बात भी हुई। वैसे तो मैं उनको बहुत सम्मान देता हूं, इज्जत देता हूं क्योंकि वो नेता प्रतिपक्ष हैं, बड़े नेता हैं। लेकिन, पार्लियामेंट चलाने के लिए हमने जो कोशिश की हैं, वो कामयाब नहीं हुई और सबको मालूम है, राहुल गांधी चाहें तो कांग्रेस सांसद ये जो गाली-गलौज करते हैं, नारेबाजी करते हैं, हंगामा करते हैं, वो नहीं करेंगे। राहुल गांधी ही एक ऐसे नेता हैं कांग्रेस पार्टी में जो अपने सांसदों का जो व्यवहार है, उसको ठीक कर सकते हैं।
सवाल : एआईसीसी दफ्तर में 'वंदे मातरम' को पूरा गाने पर आपत्ति जताने के मामले पर आप क्या कहेंगे?
जवाब : वंदे मातरम को लेकर एक कानून है। यह किसी खास पार्टी या धर्म का गीत नहीं है। यह राष्ट्रीय गीत है। हर किसी को वंदे मातरम गाना चाहिए और हर भारतीय को इसका सम्मान करना चाहिए।
सवाल : कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर जो टिप्पणी की, इसे कैसे देखते हैं?
जवाब : देश के प्रधानमंत्री सबके होते हैं। वे भले ही किसी खास पार्टी से चुने गए हों, लेकिन प्रधानमंत्री पूरे देश के होते हैं। अगर आप प्रधानमंत्री का मजाक उड़ाते हैं, तो इससे देश की बदनामी होती है।
सवाल : क्या इटली में भी गांधी परिवार की संपत्ति है, इसकी जांच होनी चाहिए?
जवाब : मुझे इसके बारे में कोई टिप्पणी नहीं करनी है।
सवाल : लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस जारी हुई, इसे कैसे देखते हैं?
जवाब : कोई नियमों का उल्लंघन करता है, तो उन्हें विशेषाधिकार नोटिस जारी किया जाता है। यह नियमों के अनुसार किया जाता है।
सवाल : आप इंडिया अलायंस के दूसरे दलों से भी मिलते हैं। उनके नेताओं का राहुल गांधी के बारे में क्या मानना है?
जवाब : फिलहाल विपक्ष कुछ बंटा हुआ है और उसमें आत्मविश्वास की कमी है। जब वे चुनाव नहीं जीत पाते, तो संसद में अपनी हताशा निकालते हैं। यह हम समझ सकते हैं।
--आईएएनएस
डीकेएम/एबीएम
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