
शहडोल जिले अंतर्गत गोहपारू स्थित शासकीय सीनियर कन्या छात्रावास में अव्यवस्थाओं से त्रस्त होकर 32 छात्राएं शनिवार देर रात करीब 3 बजे चुपचाप छात्रावास परिसर से बाहर निकल गईं। छात्रावास में घटिया भोजन, जर्जर भवन और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से छात्राएं लंबे समय से परेशान थीं। अपनी सुध न लिए जाने से आहत होकर सभी छात्राएं सीधे जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्टर को अपनी आपबीती और शिकायत दर्ज कराने के इरादे से रात के अंधेरे में ही पैदल शहडोल की ओर चल पड़ीं।
कड़ाके की ठंड और अंधेरे के बीच छात्राएं मुख्य मार्ग पर करीब 16 किलोमीटर का लंबा सफर तय कर सुबह तक शहडोल से 8 किलोमीटर पहले स्थित निपानिया गांव तक पहुंच गईं। रास्ते से गुजर रहे ग्रामीणों और राहगीरों ने जब इतनी बड़ी संख्या में स्कूली छात्राओं को पैदल जाते देखा, तो मामले की सूचना तुरंत पुलिस और जिला प्रशासन को दी गई। छात्राओं के इतनी दूर पैदल निकल आने की खबर मिलते ही प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया।
सूचना मिलते ही जनजातीय कार्य विभाग के डिप्टी कमिश्नर आनंद राय सिन्हा और स्थानीय पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने निपानिया गांव के पास छात्राओं को रोका और सड़क किनारे ही बैठकर उनकी समस्याओं को विस्तार से सुना। छात्राओं ने भोजन की खराब गुणवत्ता, पानी की किल्लत और छात्रावास भवन की दुर्दशा को लेकर अपना आक्रोश व्यक्त किया। अधिकारियों द्वारा सभी समस्याओं का शीघ्र निराकरण कराने और व्यवस्था दुरुस्त करने का ठोस आश्वासन दिए जाने के बाद छात्राएं वापस लौटने को राजी हुईं। इसके बाद प्रशासन ने एक विशेष बस की व्यवस्था कर सभी छात्राओं को सुरक्षित वापस गोहपारू छात्रावास भिजवाया।
शहडोल जिले के जनजातीय और कस्तूरबा छात्रावासों में प्रशासनिक उदासीनता का आलम यह है कि पिछले दो महीनों के भीतर छात्र-छात्राओं द्वारा हॉस्टल छोड़कर इस तरह पैदल निकलने का यह पांचवां मामला सामने आया है। लगातार घट रही ऐसी घटनाएं जनजातीय कार्य विभाग की आवासीय व्यवस्थाओं और जमीनी निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि लापरवाह अधीक्षकों और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए ताकि छात्राओं को ऐसे जोखिम भरे कदम उठाने पर मजबूर न होना पड़े।
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