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सीधी: सीएम हेल्पलाइन में लापरवाही पर कलेक्टर का हंटर, स्वास्थ्य और शिक्षा समेत कई विभागों के अफसरों को नोटिस, कटेगा वेतन

सीधी. जिले में आम जनता की समस्याओं के निराकरण में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी ने सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों के समाधान में उदासीनता और लापरवाही बरतने वाले विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। मंगलवार रात जारी किए गए इन नोटिसों में स्पष्ट किया गया है कि जन समस्याओं की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन की इस अचानक हुई कार्रवाई से जिला मुख्यालय के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

दर्जन भर से ज्यादा विभागों के प्रमुखों को चेतावनी कलेक्टर द्वारा जारी नोटिस की जद में जिले के कई महत्वपूर्ण विभागों के प्रमुख आए हैं। इनमें मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. बबिता खरे, सिविल सर्जन, जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त जे.एस. उइके, और जिला शिक्षा अधिकारी समेत लोक निर्माण विभाग, कृषि विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, और ऊर्जा विभाग के कार्यपालन यंत्री शामिल हैं। इन सभी अधिकारियों को शिकायतों के निराकरण की कछुआ चाल और समय सीमा पार होने के बावजूद पोर्टल पर पेंडेंसी बने रहने के कारण स्पष्टीकरण मांगा गया है।

तीन दिन की मोहलत, सात दिन का वेतन काटने की तैयारी प्रशासन ने अधिकारियों को अपना जवाब और शिकायतों के निराकरण का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के लिए महज तीन दिन का समय दिया है। कलेक्टर ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो न केवल अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, बल्कि संबंधित अधिकारियों के सात दिन के वेतन कटौती का प्रस्ताव भी वरिष्ठ कार्यालय को भेजा जाएगा। यह कदम उन अधिकारियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है जो सीएम हेल्पलाइन को प्राथमिकता नहीं दे रहे थे।

जवाबदेही तय करने की कवायद कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी का उद्देश्य सीएम हेल्पलाइन जैसी महत्वपूर्ण योजना की सार्थकता बनाए रखना है, ताकि दूर-दराज के ग्रामीणों को अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर न काटने पड़ें। इस कार्रवाई के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि पेंडिंग पड़ी शिकायतों का तेजी से निपटारा होगा और विभाग प्रमुख अपनी जवाबदेही के प्रति अधिक गंभीर होंगे। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सात दिन बाद स्थिति की समीक्षा की जाएगी और लापरवाही जारी रहने पर 'एकतरफा कार्रवाई' सुनिश्चित होगी।

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