
सीधी जिले की मझौली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत पोंडी में कथित भ्रष्टाचार के मामले में जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) द्वारा जांच समिति गठित किए जाने के बावजूद करीब डेढ़ माह बाद भी जांच पूरी नहीं हो सकी। मामले को लेकर ग्रामीणों और स्थानीय स्तर पर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत पोंडी में कथित अनियमितताओं और निर्माण कार्यों में गड़बड़ी से संबंधित खबरें प्रकाशित होने के बाद 23 जून 2026 को जनपद पंचायत मझौली की मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने जांच समिति गठित करने के आदेश जारी किए थे।
आदेश में अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी, सहायक यंत्री और पंचायत समन्वयक को जांच समिति में शामिल करते हुए निर्धारित समय सीमा के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।
आरोप है कि निर्धारित समय सीमा समाप्त होने और करीब डेढ़ माह बीत जाने के बाद भी जांच पूरी नहीं हुई। इससे ग्रामीणों के बीच नाराजगी है और सवाल उठ रहे हैं कि जांच में देरी की वजह क्या है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर जांच होती, तो मामले में आगे की कार्रवाई भी हो सकती थी।

मामले को लेकर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि जांच की प्रगति को लेकर स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मामले की जानकारी लेने के प्रयासों के बावजूद उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
जानकारी के अनुसार, जांच में देरी का मुद्दा जिला पंचायत के अधिकारियों के संज्ञान में भी लाया गया है। अब यह देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या निर्णय लेता है और जांच रिपोर्ट कब तक सार्वजनिक होती है।
फिलहाल, जांच पूरी होने और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने का इंतजार है।
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