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सिख संग्रहालय नई पीढ़ी को इतिहास और बलिदान से जोड़ेगा, वीर बाल दिवस ने शहादत को दिया वैश्विक सम्मान : निर्मल सिंह


लखनऊ, 17 जुलाई (आईएएनएस)। हरियाणा के कुरुक्षेत्र में सिख गुरुओं की विरासत और सिख परंपरा को समर्पित प्रस्तावित सिख संग्रहालय की आधारशिला रखे जाने का स्वागत करते हुए केंद्रीय सिंह सभा गुरुद्वारा आलमबाग, लखनऊ के अध्यक्ष निर्मल सिंह ने इसे ऐतिहासिक पहल बताया। उन्होंने कहा कि यह संग्रहालय आने वाली पीढ़ियों को सिख इतिहास, बलिदान और भारत की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता को भी मजबूत करेगा।

लखनऊ, 17 जुलाई (आईएएनएस)। हरियाणा के कुरुक्षेत्र में सिख गुरुओं की विरासत और सिख परंपरा को समर्पित प्रस्तावित सिख संग्रहालय की आधारशिला रखे जाने का स्वागत करते हुए केंद्रीय सिंह सभा गुरुद्वारा आलमबाग, लखनऊ के अध्यक्ष निर्मल सिंह ने इसे ऐतिहासिक पहल बताया। उन्होंने कहा कि यह संग्रहालय आने वाली पीढ़ियों को सिख इतिहास, बलिदान और भारत की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता को भी मजबूत करेगा।

निर्मल सिंह ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सिख इतिहास और परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिए जाने से सिख समाज में सकारात्मक संदेश गया है। आज का दिन हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने स्वयं सिख इतिहास और शहादतों के संरक्षण की आवश्यकता को समझा है। सिख इतिहास भले लगभग 550 वर्षों का हो, लेकिन इसमें त्याग, बलिदान और मानवता की सेवा की अनगिनत मिसालें हैं।"

उन्होंने कहा, "गुरु नानक देव जी ने ऐसे समय में समाज को समानता का संदेश दिया, जब जाति और छुआछूत का गहरा प्रभाव था। जिस दौर में समाज में ऊंच-नीच का भेदभाव था, उस समय गुरु नानक देव जी ने लंगर की परंपरा शुरू कर सभी लोगों को एक पंक्ति में बैठाकर भोजन कराया। जिन कार्यों को समाज निम्न समझता था, गुरु साहिब ने उन्हें सेवा का सर्वोच्च रूप बताया।"

निर्मल सिंह ने कहा, "प्रस्तावित सिख संग्रहालय में यदि सिख गुरुओं, साहिबजादों और सिख योद्धाओं के बलिदान को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया जाएगा तो इससे नई पीढ़ी को अपने इतिहास से जुड़ने और राष्ट्र सेवा की प्रेरणा मिलेगी। महाराजा रणजीत सिंह के शासन, चार साहिबजादों, माता गुजरी और गुरु गोबिंद सिंह जी के परिवार के बलिदानों का इतिहास देश के हर नागरिक तक पहुंचना चाहिए। 22 दिसंबर से 27 दिसंबर तक का वह कालखंड सिख इतिहास में अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक है। चारों साहिबजादों, माता गुजरी और परिवार के अन्य सदस्यों ने धर्म और मानवता की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। जब इन घटनाओं को संग्रहालय में आधुनिक तरीके से प्रस्तुत किया जाएगा तो बच्चों और युवाओं को देश और धर्म के लिए समर्पण की प्रेरणा मिलेगी।"

वीर बाल दिवस मनाए जाने के निर्णय पर उन्होंने कहा, "यह लंबे समय से सिख समाज की मांग थी। छोटे साहिबजादों की शहादत को देश और दुनिया तक पहुंचाने की आवश्यकता थी। आज वीर बाल दिवस केवल भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी मनाया जा रहा है। इससे बच्चों को साहस, धर्म और नैतिक मूल्यों का संदेश मिल रहा है।"

1984 के सिख विरोधी दंगों का उल्लेख करते हुए निर्मल सिंह ने कहा, "सिख समाज ने देश की आजादी और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। विभाजन के दौरान सबसे अधिक पीड़ा पंजाब और सिख समुदाय ने झेली। देश के विभाजन के समय लाखों सिख प्रभावित हुए और बाद में 1984 के दंगों का दर्द भी समाज ने सहा। दंगा पीड़ितों के पुनर्वास और न्याय की दिशा में हाल के वर्षों में प्रयास किए गए हैं। पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदनशीलता दिखाई गई, उन्हें मुआवजा दिया गया और कई मामलों में कानूनी कार्रवाई भी आगे बढ़ी। इससे पीड़ितों में न्याय की उम्मीद मजबूत हुई है।"

उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री का गुरुद्वारों में जाकर नतमस्तक होना केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि सिख गुरुओं की शहादत और उनके आदर्शों के प्रति सम्मान का प्रतीक भी है। इससे सिख समाज स्वयं को सम्मानित महसूस करता है। सिख समाज हमेशा देश की एकता, भाईचारे और प्रगति के लिए समर्पित रहा है और आगे भी इसी भावना के साथ राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाता रहेगा।

--आईएएनएस

एससीएच/एबीएम

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