
मुंबई/नई दिल्ली. भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का दौर लगातार दूसरे दिन भी जारी है। गुरुवार, 23 अप्रैल 2026 को शुरुआती कारोबार में ही निवेशकों ने बिकवाली का रुख अपनाया, जिससे प्रमुख सूचकांक लाल निशान में आ गए। वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आए उछाल ने दलाल स्ट्रीट पर डर का माहौल बना दिया है।
आज सुबह के सत्र में सेंसेक्स 400 अंक (0.56%) की भारी गिरावट के साथ 78,100 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 100 अंक (0.40%) टूटकर 24,280 के करीब पहुंच गया।
बाजार की इस गिरावट के पीछे मुख्य रूप से ऑटो सेक्टर में हो रही भारी बिकवाली है। हालांकि, गिरते बाजार में भी फार्मा शेयरों ने थोड़ी मजबूती दिखाई है और निवेशक सुरक्षा के लिहाज से इनमें खरीदारी कर रहे हैं।
बाजार के गिरने की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग है।
ब्रेंट क्रूड: ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): ईरान और पश्चिम के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई रूट पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने तेल की कीमतों को हवा दी है, जिसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर दिख रहा है।
इससे पहले बुधवार, 22 अप्रैल को भी बाजार भारी नुकसान के साथ बंद हुआ था:
सेंसेक्स: कल 757 अंक (0.95%) गिरकर 78,516 पर बंद हुआ था।
निफ्टी: कल 199 अंक (0.81%) की गिरावट के साथ 24,378 पर रहा।
दो दिनों के भीतर ही निवेशकों की करोड़ों रुपये की संपत्ति स्वाहा हो चुकी है। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता, बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी।
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