
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 31 वर्षीय ट्रांसवुमेन जेन कौशिक को दिल्ली सरकार के स्कूलों में शिक्षक पद के लिए ‘ट्रांसजेंडर’ श्रेणी के तहत आवेदन करने की विशेष अनुमति दे दी है।
जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने यह आदेश जारी करते हुए दिल्ली सरकार, शिक्षा निदेशालय (DOE), समाज कल्याण विभाग, दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।
अदालत ने एक अंतरिम आदेश में जेन कौशिक को DSSSB के ऑनलाइन आवेदन पंजीकरण प्रणाली (OARS) पोर्टल पर ट्रांसजेंडर के रूप में आवेदन करने की अनुमति दी। याचिका में बताया गया था कि वर्तमान पोर्टल केवल ‘पुरुष’ और ‘महिला’ विकल्प ही उपलब्ध कराता है, जिससे ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों को आवेदन में कठिनाई होती है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व आदेश का हवाला देते हुए कहा कि वही राहत यहां भी प्रदान की जा रही है।
इसके साथ ही कोर्ट ने उस व्यापक मांग पर भी विचार करने की सहमति जताई है, जिसमें दिल्ली सरकार के तहत सरकारी नौकरियों में ट्रांसजेंडर लोगों के लिए अलग से वैकेंसी और एक स्पष्ट भर्ती नीति बनाने की मांग की गई है।
याचिका में ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 के प्रावधानों को लागू करने पर जोर दिया गया है, जो रोजगार में भेदभाव को रोकने और समान अवसर सुनिश्चित करने का अधिकार देता है।
यह फैसला ट्रांसजेंडर समुदाय के रोजगार अधिकारों और समानता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
Leave A Reviews