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चंबल घड़ियाल अभयारण्य में अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य (NCGS) में हो रहे अंधाधुंध अवैध खनन पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। शुक्रवार को एक अहम सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि नदी किनारे चल रही अवैध गतिविधियों के कारण इस संरक्षित क्षेत्र में पर्यावरणीय तबाही का संकट पैदा हो गया है। जजों की पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि स्थिति पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो यह घड़ियाल संरक्षण परियोजना के लिए एक अपूरणीय क्षति होगी।

मध्य प्रदेश सरकार को अर्धसैनिक बलों की चेतावनी

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। कोर्ट ने कहा कि पारिस्थितिक रूप से नाजुक इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रेत का अवैध उत्खनन हो रहा है। पीठ ने सख्त लहजे में कहा, "अगर राज्य सरकार अपराधियों के खिलाफ सख्त अभियोजन शुरू करने में विफल रहती है, तो अदालत चंबल घड़ियाल अभयारण्य में नकेल कसने के लिए अर्धसैनिक बलों की तैनाती का आदेश देगी।" मामले की अगली सुनवाई अब 11 मई को निर्धारित की गई है।

दुनिया के 90% घड़ियालों का प्राकृतिक आवास

यह अभयारण्य वर्ष 1978 में स्थापित किया गया था, जो राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के लगभग 5,400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। चंबल घड़ियाल अभयारण्य दुनिया की लगभग 90% जंगली घड़ियाल आबादी का घर है। यह गंभीर रूप से संकटग्रस्त घड़ियालों के अलावा गंगा नदी डॉल्फिन, मगरमच्छ और कछुओं की आठ दुर्लभ प्रजातियों के लिए भी सुरक्षित आश्रय स्थल माना जाता है। अवैध रेत खनन सीधे तौर पर इनके प्रजनन और अस्तित्व को प्रभावित कर रहा है।

पर्यटन और जैव विविधता पर मंडराता खतरा

चंबल नदी का करीब 400 किलोमीटर लंबा हिस्सा अपनी स्वच्छता और प्रदूषण मुक्त जल के लिए जाना जाता है। धौलपुर, सवाई माधोपुर और आगरा जैसे प्रवेश बिंदुओं से पर्यटक यहाँ नाव सफारी का आनंद लेते हैं। 330 से अधिक पक्षी प्रजातियों वाला यह क्षेत्र जैव विविधता के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने यह साफ कर दिया है कि खनन माफियाओं के कारण न केवल पर्यावरण, बल्कि देश की प्राकृतिक विरासत भी खतरे में है।

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