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तलाक पीड़ित बेसहारा महिलाओं को वक्फ बोर्ड देगा घर, अगले महीने लाएंगे प्रस्ताव : शादाब शम्स


नई दिल्ली, 25 सितंबर (आईएएनएस)। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने तीन तलाक और हलाला पीड़ित बेघर और बेसहारा महिलाओं को सहारा देने के लिए एक बड़ी पहल का ऐलान किया। वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने कहा कि बोर्ड के पास मौजूद लैंड बैंक और संपत्तियों का इस्तेमाल अब उनके असली हकदारों, यतीमों, मिस्कीनों और विधवाओं के लिए किया जाएगा।

नई दिल्ली, 25 सितंबर (आईएएनएस)। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने तीन तलाक और हलाला पीड़ित बेघर और बेसहारा महिलाओं को सहारा देने के लिए एक बड़ी पहल का ऐलान किया। वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने कहा कि बोर्ड के पास मौजूद लैंड बैंक और संपत्तियों का इस्तेमाल अब उनके असली हकदारों, यतीमों, मिस्कीनों और विधवाओं के लिए किया जाएगा।

शादाब शम्स ने कहा, "वक्फ प्रॉपर्टीज का एक लैंड बैंक है। हम केयरटेकर हैं, और हमारे पास कई घर और संपत्तियां हैं। हम सरकार के साथ बैठकर बात करेंगे कि हम उन्हें बेहतर तरीके से कैसे सौंप सकते हैं। मुझे उम्मीद है क्योंकि मैंने हमारे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बात की, और उन्होंने बहुत सकारात्मक जवाब दिया। जब से वक्फ संशोधन एक्ट आया है, तब से बेसहारा महिलाओं में उम्मीद जगी है और अब गरीबों को उनका हक मिलेगा। उसी लाइन को आगे बढ़ाते हुए उत्तराखंड की धामी सरकार एक फैसला लेने जा रही है।"

उन्होंने कहा कि अगले महीने की मीटिंग में हम एक प्रस्ताव रख रहे हैं कि जो महिलाएं तीन तलाक या हलाला पीड़ित हैं और बेघर या बेसहारा हैं, उन्हें वक्फ बोर्ड सहारा देगा। वक्फ बोर्ड उन्हें रहने की जगह देगा ताकि वे बिना किसी मकसद के न भटकें। उत्तराखंड की धामी सरकार यूसीसी लेकर आई है और उसी की ग्राउंडिंग में हम यह कोशिश कर रहे हैं कि बेटियों को उनके हक दिए जा सकें। जो बेसहारा हैं, वक्फ तो उन्हीं के लिए था। वक्फ सदके, जकात, और खैरात का पैसा है। यह यतीमों, मिस्कीनों, बेवाओं और बेसहाराओं का हक था, लेकिन इसके ऊपर कुछ राजनीतिक दलों के नेता और उनके कार्यकर्ता बैठ गए और वक्फ का जो असली मकसद था, वह खत्म हो गया।

उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश उस मकसद को जमीन पर उतारने की है, उन बेटियों को उनके अधिकार दिलाने की है और फिर उन्हें सशक्त बनाकर रोजगार से जोड़ने की है, ताकि वे बेटियां आत्मनिर्भर होकर अपने बच्चों का पालन-पोषण कर सकें और किसी के सामने झुकना न पड़े। जिस तरह उत्तराखंड में हलाला के दो-तीन मामले सामने आए हैं, उनमें देखने को मिला कि बेटी को मजबूर किया गया और उससे कहा गया कि "तुम कहां जाओगी, तुम्हारे भाई तुम्हें नहीं रखेंगे, और पति ने तलाक देकर घर से निकाल दिया है तो अब तुम कहां जाओगी?" ऐसे में वह कहीं न कहीं इसी दबाव में रहती हैं कि "मैं कहां जाऊंगी।"

--आईएएनएस

केके/एबीएम

Date & Time : 2026-09-26 00:00:03

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